लखनऊ, 2 फरवरी 2026:
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कृषि उत्पादन की असली ताकत अच्छे, भरोसेमंद और प्रमाणित बीज में होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलती परिस्थितियों और घटती जोत के बीच अब खेती में रकबा बढ़ाने की बजाय प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। इसके लिए प्रदेश में एक आधुनिक और दूरदर्शी ‘बीज नीति’ तैयार करना समय की जरूरत है, जो आने वाले वर्षों की कृषि चुनौतियों का समाधान दे सके।
आधुनिक ‘बीज नीति’ पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि जोत लगातार कम हो रही है, ऐसे में उच्च उपज देने वाली, रोग प्रतिरोधी और जलवायु के अनुकूल किस्मों का विकास जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी बीज नीति बनाई जाए, जो किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ स्थिर आय भी दे। उन्होंने बीज को खेती की रीढ़ बताते हुए कहा कि मजबूत बीज व्यवस्था के बिना कृषि में बड़ा बदलाव संभव नहीं है।
बीज उत्पादन के लिए पांच साल का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने अगले पांच वर्षों के लिए प्रदेश की बीज उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और उपलब्धता बढ़ाने का ठोस रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए, ताकि प्रमाणित बीज की कोई कमी न रहे और किसान समय पर गुणवत्तायुक्त बीज प्राप्त कर सकें।
हर बीज की ट्रेसेबिलिटी अनिवार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों तक पहुंचने वाले हर बीज की एंड टू एंड ट्रेसेबिलिटी अनिवार्य की जाए। मिलावटी और अमानक बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, उपकार और निजी बीज उद्योग को एक मंच पर लाकर बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म जारी करने की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया।
सीड पार्क और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की योजना
फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के लिए विशेष रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि अगले पांच वर्षों में प्रदेश में कम से कम 5 सीड पार्क स्थापित किए जाएंगे, जहां बीज उत्पादन, परीक्षण, प्रसंस्करण और भंडारण की सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर होंगी। इसके साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रमों से जोड़ते हुए हर जलवायु क्षेत्र में एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने को कहा गया।
ऊर्जा दक्ष खेती की ओर कदम
मुख्यमंत्री ने कृषि में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि अधिक से अधिक ट्यूबवेलों का सौर ऊर्जीकरण किया जाए, जिससे किसानों की सिंचाई लागत कम हो। साथ ही प्रदेश के सोलर पैनल निर्माताओं को प्राथमिकता देने की बात कही, ताकि स्थानीय उद्योग को बढ़ावा मिले, रोजगार के अवसर बढ़ें और कृषि अवसंरचना मजबूत हो।






