लखनऊ, 8 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक अहम पहल की है। प्रदेश में अब पौधरोपण के लिए प्लास्टिक के गमलों की जगह गोबर से बने ऑर्गेनिक गमलों का इस्तेमाल किया जाएगा। इस योजना के तहत करीब सात हजार गोशालाओं में बड़े पैमाने पर गमलों का निर्माण होगा। इससे न सिर्फ पर्यावरण को फायदा मिलेगा, बल्कि हर जिले में रोजगार के नए मौके भी पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आत्मनिर्भर गोशाला मॉडल के अनुरूप उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने यह योजना तैयार की है। आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि वृहद पौधरोपण अभियान में पौधों को पॉलीथिन के बजाय गोबर के गमलों में लगाया जाएगा। इस साल करीब पांच करोड़ गमले तैयार करने की योजना है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में वन मंत्री अरुण सक्सेना से बातचीत हुई है और नर्सरियों में ऑर्गेनिक गमलों के इस्तेमाल पर सहमति बनी है। इससे प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी और पर्यावरण को नुकसान भी कम होगा।

प्रदेश के हर जिले में महिला स्वयं सहायता समूह और युवा उद्यमियों के जरिए गमलों का निर्माण कराया जाएगा। इससे गांव-गांव में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गोशालाएं भी आत्मनिर्भर बनेंगी। यह पहल गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता की दिशा में मजबूत कदम मानी जा रही है।
गो सेवा आयोग के ओएसडी अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि गोबर से बने ये गमले पूरी तरह ऑर्गेनिक होते हैं और पौधरोपण के बाद मिट्टी में खुद ही घुल जाते हैं। इससे पौधों की जड़ों को नुकसान नहीं होता और उन्हें शुरुआती समय में भरपूर पोषण भी मिलता है। इससे पौधों के जीवित रहने की दर बढ़ेगी।
इस योजना से प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और गोशालाओं को आजीविका से जोड़ा जा सकेगा। साथ ही स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक संगठन और आम लोग भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करेंगे। गो सेवा आयोग का मानना है कि यह पहल सिर्फ पर्यावरण बचाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि प्लास्टिक मुक्त उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को जन आंदोलन का रूप देगी।






