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जन्मदिन विशेष: साल 1994 में आई एक फिल्म… और रातोंरात बदल गई जिंदगी, जानिए सीमा बिस्वास के हौसले और अभिनय की कहानी

'बैंडिट क्वीन' में फूलन देवी का साहसी किरदार निभाकर सीमा बिस्वास ने समाज की कड़वी सच्चाई को पर्दे पर उतारा, जिसने उन्हें पहली ही फिल्म से ऐतिहासिक पहचान दिलाई। पिता के समर्थन और अपने जज्बे के बल पर उन्होंने दर्द, डर और विवादों के बावजूद एक मजबूत अभिनय यात्रा की नींव रखी

मनोरंजन डेस्क, 14 जनवरी 2026:

फूलन देवी की जिंदगी की सच्चाई को पर्दे पर उतारना सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक गहरा भावनात्मक और मानसिक संघर्ष था। ‘बैंडिट क्वीन’ में सीमा बिस्वास ने वह साहसी कदम उठाया, जिसे करना किसी भी कलाकार के लिए आसान नहीं था। एक ऐसा दर्दनाक सीन, जिसने समाज की क्रूर सच्चाई को उजागर किया, उसे निभाने के बाद सीमा पूरी रात रोती रहीं। उस वक्त टूट चुकी सीमा को आगे बढ़ने की हिम्मत उनके पिता की एक बात ने दी, जिसने इस किरदार को इतिहास बना दिया।

पहली फिल्म से मिली ऐतिहासिक पहचान

बॉलीवुड में बहुत कम कलाकार ऐसे होते हैं, जिन्हें पहली ही फिल्म से ऐसी मजबूत पहचान मिल जाती है। असम में 14 जनवरी 1965 को जन्मीं सीमा बिस्वास उन्हीं में से एक हैं। थिएटर से फिल्मों तक का उनका सफर साल 1994 में आई फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ से बदल गया। इस फिल्म से पहले फूलन देवी की कहानी लोगों तक उस गहराई से नहीं पहुंची थी, जैसी सच्चाई सीमा बिस्वास ने पर्दे पर दिखाई।

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फूलन देवी का किरदार, आसान नहीं था फैसला

शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन में फूलन देवी का किरदार निभाना सीमा के लिए बेहद साहसी कदम था। यह उनकी पहली फिल्म थी और उसी में उन्होंने समाज की सबसे कड़वी और डरावनी सच्चाई को दिखाने की हिम्मत की। उस दौर में किसी महिला किरदार को इस तरह पेश करना आम बात नहीं थी। यह सीन सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि अत्याचार की भयावहता दिखाने के लिए फिल्माया गया था, जिसने दर्शकों को झकझोर दिया।

डर, दर्द और डायरेक्टर की सोच

सीमा बिस्वास ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस सीन के बारे में जानकर वह परेशान भी थीं और उसे करना भी चाहती थीं। जब उन्होंने डायरेक्टर शेखर कपूर से सवाल किया, तो उन्होंने साफ कहा कि यह घटना इतनी अमानवीय थी कि इसे सच्चाई के साथ दिखाना जरूरी है। शूटिंग के वक्त माहौल इतना भावुक था कि पूरी यूनिट रो पड़ी। हालांकि बाद में सीमा ने साफ किया कि उस सीन में उनकी जगह बॉडी डबल का इस्तेमाल किया गया था और शूटिंग के दौरान सिर्फ डायरेक्टर और कैमरामैन मौजूद थे।

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परिवार का साथ बना हौसले की ताकत

सीमा बिस्वास के परिवार का कला से गहरा नाता रहा है। उनकी मां एक्ट्रेस थीं और बहनों में कोई सिंगर तो कोई डांसर और पेंटर है। एनएसडी से पढ़ाई करने वाली सीमा के लिए यह फिल्म उनके परिवार के लिए भी भावनात्मक थी। जब उनके पिता ने फिल्म देखी, तो गहरी सांस लेकर कहा था, “यह रोल हमारी सीमा ही कर सकती है।” पिता के ये शब्द सीमा के लिए सबसे बड़ी ताकत बने।

एक फिल्म नहीं, मजबूत करियर की पहचान

बैंडिट क्वीन के बाद सीमा बिस्वास ने वॉटर, एक हसीना थी, खामोशी, कंपनी, पिंजर, भूत और रिस्क जैसी कई यादगार फिल्मों में काम किया। वॉटर फिल्म को विवादों का सामना करना पड़ा और इसे बैन भी किया गया, फिर भी सीमा के अभिनय की तारीफ हुई। हाल ही में ओटीटी सीरीज ‘कालकूट’ में विजय वर्मा की मां के किरदार में भी उन्होंने गहरी छाप छोड़ी। सीमा बिस्वास आज भी मजबूत और सशक्त अभिनय की मिसाल मानी जाती हैं।

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