लखनऊ, 5 जनवरी 2026:
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर सार्वजनिक (सरकारी) क्षेत्र के बैंककर्मियों ने सोमवार को पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू न किए जाने के विरोध में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मुख्य शाखा पर धरना देकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बैंककर्मियों ने सरकार और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को पुरजोर ढंग से रखा।
धरने को संबोधित करते हुए फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने कहा कि बैंककर्मी लंबे समय से पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग कर रहे हैं। इसके लिए कई चरणों में आंदोलन, प्रदर्शन और ट्विटर अभियान भी चलाया जा चुका है लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है।
संगठन के महामंत्री डीके सिंह ने केंद्र सरकार पर कठोर रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार बैंककर्मियों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। जानबूझकर कर्मचारियों को हड़ताल की ओर धकेल रही है। उन्होंने बताया कि इसी मुद्दे को लेकर आज देशभर में बैंककर्मियों ने एक साथ धरना-प्रदर्शन किया है।

प्रदेश संयोजक वाईके अरोड़ा ने कहा कि यदि बैंकिंग क्षेत्र में हड़ताल होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि बढ़ते कार्यभार, मानसिक तनाव और लगातार दबाव के बीच बैंककर्मियों के लिए पांच दिवसीय बैंकिंग अब अनिवार्य हो चुकी है।
सभा को संबोधित करते हुए वाईके शर्मा, मनमोहन दास, अजय पाण्डेय, आरएन शुक्ला, लक्ष्मण सिंह, एसके संगतानी, कमल जी, ललित श्रीवास्तव, संदीप सिंह, वीके माथुर, बीडी पाण्डेय, एसडी मिश्रा, विभाकर कुशवाहा, आनंद सिंह, विशाखा वर्मा सहित अन्य बैंक नेताओं ने कहा कि जब कई सरकारी विभागों और वित्तीय संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू है तो बैंककर्मियों को इससे अलग रखना सरासर अन्याय है।
धरने में शामिल धनंजय सिंह, आकाश शर्मा, अभिषेक तिवारी, करुणेश शुक्ला, तारकेश्वर चौहान, शिवकुमार सिंह, बृजेश तिवारी, मोनिका शुक्ला और दिनेश विश्वकर्मा ने सरकार और आईबीए को चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने बताया कि पांच दिवसीय बैंकिंग की मांग को लेकर 27 जनवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। इस दिन देशभर के सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बंद रहेंगे।






