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जयंती: संत रविदास को दी श्रद्धांजलि, सीएम ने कहा…संतों ने समाज को जोड़ा, वही सरकार कर रही

कानपुर रोड स्थित मठ में जयंती पर हुई श्रद्धांजलि सभा, आसपास जिलों से जुटी भारी भीड़, 2017 से पहले उपेक्षित पड़ी संत की जन्मभूमि को भाजपा सरकार में धाम में बदलने का किया उल्लेख

लखनऊ, 1 फरवरी 2026:

राजधानी में कानपुर रोड स्थित संत रविदास मठ पर संत शिरोमणि रविदास की जयंती के पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि सद्गुरु ने कर्म से सेवा, समरसता और समानता का जो संदेश दिया, वह आज भी हमें प्रेरित करता है। आज ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास, सबका विश्वास’ का जो संकल्प है, उसकी आत्मा गुरु रविदास की शिक्षाओं में है।

संत रविदास को श्रद्धांजलि देकर सीएम ने कहा कि आज माघी पूर्णिमा पर संत शिरोमणि सद्गुरु रविदास महाराज की पावन जयंती है। आज से 649 वर्ष पूर्व उनका प्रकटीकरण काशी के सीर गोवर्धन में हुआ था। इतने वर्षों बाद भी उनकी दिव्य आभा से यह समाज आलोकित होकर ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

समाज को जोड़ने का जितना बड़ा कार्य संतों ने किया, वह अद्भुत था। उसी नींव पर वर्तमान भारत का निर्माण हुआ है। 600 साल पहले क्या स्थितियां रही होंगे। उस समय भी रविदास महाराज जी प्रेरणा दे रहे हैं। उनकी प्रेरणा थी कि ऐसा राज्य होना चाहिए, जहां सबको अन्न मिले। हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर मिल सके।

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उन्होंने 600 साल पहले ये उपदेश दिए। एक संत की वाणी कभी व्यर्थ नहीं होती है। हो सकता है कि मुगलों और ब्रिटिश सरकार ने भुला दिया हो, आजादी के बाद की सरकारों ने भुला दिया हो। लेकिन, जब भाजपा सरकार बनी तो हर गरीब का अकाउंट खुलवाया। हर घर में शौचालय बनवाया। रसोईघर के कनेक्शन दिए। पिछले 6 वर्ष से हर जरूरतमंद पर राशन दिया जा रहा है। यह सद्गुरु रविदास जी ही प्रेरणा है।

कहा कि संत रविदास को जब लोगों ने कहा कि चलिए गंगा स्नान करने, तो उन्होंने अपने काम को महत्व दिया। कहा- मन चंगा तो कठौती में गंगा। जो लोग आरोप लगाते हैं कि समाज में भेदभाव था। आप याद करिए, जगद्गुरु रामानंदाचार्य ने मध्य काल में 12 शिष्य बनाए। सभी शिष्य अलग-अलग जातियों से थे। एक महिला को भी उन्होंने शिष्य बनाया। उन्होंने यह सब समाज को जोड़ने के लिए किया था।

2017 से पहले संत रविदास की जन्मभूमि क्षीर गोवर्धन में जाने का मार्ग नहीं था। लंगर का हॉल नहीं था। आज फोरलेन की सड़क से उनकी जन्मभूमि को जोड़ा गया है। वहां संत रविदास जी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई। आज एक धाम बन गया है। हम सबके मन में महापुरुषों के प्रति यही आदर का होना चाहिए। विभाजनकारी ताकतें बाटेंगी। हमें गुलामी के कालखंड को याद करते हुए उन्हें सिर उठाने का अवसर नहीं देना है। एकजुट होकर समाज की संरचना को मजबूत करना होगा। यही सद्गुरु रविदास महाराज की प्रेरणा थी।

माघी पूर्णिमा के अवसर पर सुबह 10:30 बजे संत रविदास मठ परिसर में जयंती समारोह की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में लंगर का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत समाज, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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