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बिजली कनेक्शन अब नहीं पड़ेगा भारी! स्मार्ट प्रीपेड मीटर व नए कनेक्शन की लागत आधी… जानें रेट एस्टीमेट सिस्टम खत्म

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने दरों में बड़ी कटौती करते हुए नई कॉस्ट डाटा बुक जारी की, गरीब और बीपीएल उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, अविकसित कॉलोनियों और मल्टीपॉइंट कनेक्शन में भी बदलाव

लखनऊ, 1 जनवरी 2026:

यूपी में नए साल की शुरुआत आम बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है। राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने बिजली कनेक्शनों और स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की दरों में बड़ी कटौती करते हुए नई कॉस्ट डाटा बुक-2025 जारी कर दी है। नए नियमों के अनुसार अब बिजली कनेक्शन लेना पहले की तुलना में न सिर्फ सस्ता होगा बल्कि प्रक्रिया भी बेहद सरल होगी।

सबसे बड़ा बदलाव मीटर की कीमतों में हुआ है। अब सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत 6016 रुपये से घटाकर 2800 रुपये निर्धारित की गई है। वहीं थ्री-फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए उपभोक्ताओं को पहले 11342 रुपये तक चुकाने पड़ते थे लेकिन अब यह केवल 4100 रुपये में उपलब्ध होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन नई दरों को लागू करने के लिए पावर कॉर्पोरेशन को 12 जनवरी 2026 तक सॉफ्टवेयर में जरूरी तकनीकी संशोधन पूरे करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

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नए कनेक्शन लेने की प्रक्रिया में भी बड़ा फेरबदल हुआ है। पहले उपभोक्ताओं को खंभा, तार, ट्रांसफार्मर आदि के नाम पर अलग-अलग शुल्क की गणना के लिए एस्टीमेट बनवाना पड़ता था। इससे लागत अक्सर 10 से 20 हजार रुपये तक पहुंच जाती थी। अब यह एस्टीमेट प्रणाली पूरी तरह खत्म कर दी गई है। फिक्स्ड चार्ज सिस्टम लागू कर दिया गया है। उदाहरण के तौर पर यदि कोई उपभोक्ता 2 किलोवाट का कनेक्शन 100 मीटर दूरी पर लेता है तो उसे अब केवल 5500 रुपये जमा करने होंगे, जबकि 300 मीटर दूरी के लिए यह शुल्क 7555 रुपये तय किया गया है।

गरीब एवं बीपीएल कार्ड धारकों के लिए कई विशेष रियायतें लागू की गई हैं। अब इनके लिए प्रोसेसिंग शुल्क तथा सुरक्षा जमा पूरी तरह शून्य कर दिया गया है। साथ ही 100 मीटर तक के कनेक्शन के लिए केवल 500 रुपये अग्रिम राशि पर कनेक्शन जारी होगा और शेष रकम उपभोक्ता 12 महीनों तक 45 रुपये मासिक किस्त में बिजली बिल के साथ अदा कर सकेंगे। इसी तरह सिंगल फेज मीटर लेने वाले बीपीएल उपभोक्ता 2800 रुपये की मीटर लागत को किस्तों में चुका सकेंगे। आवेदन के समय 1000 रुपये और बाकी रकम 24 मासिक किस्तों में भुगतान की सुविधा दी जाएगी।

नई कॉस्ट डाटा बुक के अनुसार गैर-विद्युतीकृत अविकसित कॉलोनियों में अब बुनियादी ढांचे के नाम पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। केवल मीटरिंग कॉस्ट उपभोक्ता को देनी होगी। आयोग का कहना है कि विकास शुल्क के माध्यम से पहले ही संरचना निर्माण का प्रावधान शामिल है। बहुमंजिला इमारतों में मल्टी-पॉइंट कनेक्शन के लिए भी यही नियम लागू होगा।

इसके साथ ही तकनीकी मानकों में भी संशोधन किया गया है। सप्लाई कोड 2005 के 13वें संशोधन के अनुरूप 11 केवी वोल्टेज पर लोड सीमा 3 एमवीए से बढ़ाकर 4 एमवीए कर दी गई है। वहीं पीटीडब्ल्यू उपभोक्ताओं के लिए ट्रांसफार्मर लागत साझा हिस्सेदारी घटाकर 50% से 33.3% कर दी गई है। 20 लाख रुपये से अधिक की सुरक्षा जमा के मामलों में अब उपभोक्ता बैंक गारंटी या ई-बैंक गारंटी के माध्यम से भुगतान करने का विकल्प भी चुन सकेंगे।

नियामक आयोग की यह नई कॉस्ट डाटा बुक आगामी दो वर्षों के लिए मान्य होगी। इससे पहले वर्ष 2019 में संशोधित कॉस्ट डाटा बुक जारी हुई थी। नए बदलावों से उम्मीद की जा रही है कि राज्य में बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सस्ती और उपभोक्ता अनुकूल बनेगी तथा लाखों उपभोक्ताओं को सीधे राहत मिलेगी।

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