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जन्मदिन विशेष: बॉलीवुड से साउथ तक… हर भाषा में बिखेरा सुरों का जादू, जानिए कविता कृष्णमूर्ति का सफर

बचपन से ही कविता कृष्णमूर्ति ने संगीत की दुनिया में कदम रखकर 45 भाषाओं में करीब 50 हजार गाने गाए और ‘हवा हवाई’ जैसे सुपरहिट गीतों से खास पहचान बनाई

मनोरंजन डेस्क, 25 जनवरी 2026:

कविता कृष्णमूर्ति भारतीय संगीत की उन आवाजों में शामिल हैं, जिन्होंने हर दौर और हर भाषा में अपनी पहचान बनाई। फिल्म मिस्टर इंडिया का गाना हवा हवाई उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बना, लेकिन इसके पीछे वर्षों की मेहनत और साधना छिपी है। छोटी उम्र से ही संगीत की दुनिया में कदम रखने वाली कविता ने आगे चलकर हजारों गानों से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया।

बचपन में ही दिख गई थी प्रतिभा

25 जनवरी 1958 को दिल्ली में जन्मी कविता कृष्णमूर्ति का बचपन का नाम शारदा था। तमिल परिवार में पली-बढ़ी कविता को संगीत से लगाव विरासत में मिला। उनकी गायन प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें रवींद्र संगीत और फिर हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा दिलाई गई। महज आठ साल की उम्र में म्यूजिक प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने यह साफ कर दिया था कि आगे चलकर वह बड़ी गायिका बनेंगी।

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लता मंगेशकर संग पहला कदम

कॉलेज के दिनों में कविता को फिल्मों में गाने का मौका मिला। साल 1971 में उन्होंने फिल्म श्रीमान पृथ्वीराज में लता मंगेशकर के साथ गीत गाया, जो उनके करियर का यादगार पल रहा। हालांकि उनका सपना विदेश सेवा में जाने का था, लेकिन संगीत के प्रति जुनून उन्हें मुंबई ले आया। 1976 में फिल्म कादंबरी से हिंदी सिनेमा में उनकी आवाज ने पहचान बनानी शुरू की।

नब्बे का दशक और सुरों का जलवा

नब्बे के दशक में कविता कृष्णमूर्ति की आवाज हर बड़ी फिल्म का हिस्सा बन गई। आर डी बर्मन से लेकर कुमार सानू, उदित नारायण और सोनू निगम तक, उन्होंने लगभग हर बड़े गायक और संगीतकार के साथ काम किया। हिंदी ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी उनकी मांग बढ़ी। उन्होंने 45 भारतीय और विदेशी भाषाओं में करीब 50 हजार गाने गाकर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया।

गायकी से मिला राष्ट्रीय सम्मान

कविता कृष्णमूर्ति को उनकी गायकी के लिए कई बड़े सम्मान मिले। उन्होंने लगातार तीन साल तक फिल्मफेयर अवॉर्ड जीतकर अपनी लोकप्रियता साबित की। साल 2005 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया। शास्त्रीय, गजल, पॉप और फिल्मी संगीत हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी मजबूत छाप छोड़ी।

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आज भी सुरों से जुड़ा सफर

साल 1999 में उन्होंने मशहूर वायलिन वादक एल सुब्रमण्यम से शादी की। Hai un hun JN JN आज भले ही वह फिल्मों में कम सुनाई देती हों, लेकिन देश और विदेश में उनके लाइव शो अब भी लोगों को खींच लाते हैं। बेंगलुरु में उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर एक संगीत अकादमी की शुरुआत की, जहां नई पीढ़ी को भारतीय संगीत की विरासत सिखाई जा रही है।

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