लखनऊ, 5 जनवरी 2026:
वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य हमले और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेंस की गिरफ्तारी के विरोध में दुनिया के कई देशों के साथ भारत में आवाजें उठ रही हैं। इसी कड़ी में सोमवार को यूपी की राजधानी लखनऊ में वामदलों ने जोरदार प्रदर्शन किया। परिवर्तन चौक से कलेक्ट्रेट तक निकाले गए पैदल मार्च में बड़ी संख्या में वामपंथी कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
प्रदर्शन के दौरान सीपीआई (एमएल) और अन्य वाम संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नेताओं ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अपनी दमनकारी और साम्राज्यवादी नीतियों के जरिए पूरी दुनिया में अराजकता और अस्थिरता फैलाने का काम कर रहा है। उनका कहना था कि वेनेजुएला पर की गई कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है।

सीपीआई (एमएल) नेताओं ने मांग की कि भारत सरकार इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर चुप्पी तोड़ते हुए स्पष्ट रुख अपनाए। उन्होंने कहा कि भारत को वेनेजुएला के मामले में हस्तक्षेप कर राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी की रिहाई के लिए कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए। वाम नेताओं का आरोप है कि अमेरिका ने वेनेजुएला में स्थित विशाल तेल भंडारों पर नियंत्रण के उद्देश्य से यह पूरी कार्रवाई की है।
प्रदर्शन के दौरान सीपीआई (एमएल) नेता रमेश सिंह ने कहा कि अमेरिका इससे पहले भी इराक में सद्दाम हुसैन के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई कर चुका है। उसके परिणाम आज भी पूरी दुनिया भुगत रही है। उन्होंने फिलिस्तीन में अमेरिकी समर्थन से की गई कथित बर्बरतापूर्ण कार्रवाइयों का भी जिक्र किया। रमेश सिंह ने कहा कि शांति और न्याय में विश्वास रखने वाले लोग दुनिया भर में इस अमेरिकी हमले की निंदा कर रहे हैं।

वामदलों ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जहां पूरी दुनिया अमेरिका की इस कार्रवाई की आलोचना कर रही है, वहीं भारत सरकार अब तक अपना रुख स्पष्ट करने में ढुलमुल रवैया अपना रही है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अमेरिका तत्काल वेनेजुएला से अपनी सेना वापस बुलाए, राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को रिहा करे तथा वेनेजुएला की अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करे।






