लखनऊ, 26 जनवरी 2026:
लखनऊ के वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक और शल्य विशेषज्ञ डॉ. केके ठकराल को पद्मश्री 2026 से सम्मानित किए जाने की घोषणा हुई है। आयुर्वेद में शल्य और शालाक्य चिकित्सा, खासकर क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा में उनके विशेष योगदान के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है। यह उपलब्धि लखनऊ और पूरे आयुर्वेद जगत के लिए गर्व की बात है। इनका पूरा नाम केवल कृष्ण ठकराल है आइए विस्तार से जानते हैं इनका पूरा सफर…
राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज से जुड़ा लंबा सफर
डॉ. केके ठकराल लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, टुडियागंज के पूर्व प्रधानाचार्य रह चुके हैं। इसके साथ ही वे उत्तर प्रदेश आयुर्वेदिक सेवाएं के निदेशक पद पर भी कार्य कर चुके हैं। वर्ष 1996 में उन्होंने इस पद से सेवानिवृत्ति ली। वर्तमान में वह राजाजीपुरम में अपना निजी क्लिनिक संचालित कर रहे हैं।
पाकिस्तान में जन्म, भारत में बनाई पहचान
डॉ. ठकराल का जन्म 10 अक्टूबर 1938 को पाकिस्तान में हुआ था। बाद में भारत आकर उन्होंने आयुर्वेद को अपना जीवन कार्य बनाया। उन्होंने टुडियागंज स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल से बीएएमएस की पढ़ाई की और बीएचयू से आयुर्वेदिक सर्जरी में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की।
पिता और परिवार से मिली प्रेरणा
डॉ. केके ठकराल के पिता और तीन भाई डॉक्टर रहे हैं, जिनसे उन्हें चिकित्सा क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिली। उन्होंने वर्ष 1964 में टुडियागंज आयुर्वेद कॉलेज में बीएएमएस में दाखिला लिया। लेक्चरर के रूप में करियर की शुरुआत कर वह आगे चलकर आयुर्वेद कॉलेजों के प्रधानाचार्य और फिर निदेशक बने।
क्षार सूत्र चिकित्सा में विशेष योगदान
डॉ. ठकराल आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा के बड़े विशेषज्ञ माने जाते हैं। उन्होंने क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा पद्धति में विशेष कार्य किया है, जिसका उपयोग पाइल्स, फिस्टुला और अन्य मलाशय रोगों के इलाज में किया जाता है। इस पद्धति में औषधि लगे धागे से रोगग्रस्त ऊतकों का उपचार किया जाता है। उन्होंने इस तकनीक पर कई छात्रों को प्रशिक्षण दिया और शल्य चिकित्सा के मानकीकरण में अहम भूमिका निभाई।
रिसर्च, किताबें और अंतरराष्ट्रीय पहचान
डॉ. केके ठकराल के कुल 66 रिसर्च पेपर प्रकाशित हो चुके हैं, जिनमें 54 भारत और 12 विदेशों में प्रकाशित हुए हैं। उन्होंने शल्य तंत्र के सिद्धांत सहित कई पुस्तकें लिखीं। क्षार सूत्र शल्य चिकित्सा पर उनकी एक पुस्तक अंग्रेजी भाषा में भी प्रकाशित हुई है।
गुरुओं के आशीर्वाद से मिला सम्मान
डॉ. केवल कृष्ण ठकराल ने पद्मश्री सम्मान पर खुशी जताते हुए कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने बताया कि गुरुजनों और वरिष्ठों के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई। शुरुआत से ही उन्हें सही दिशा मिली, जिसकी वजह से आज यह सम्मान मिला है। उन्होंने कहा कि जनता की सेवा करना उनका हमेशा से मुख्य उद्देश्य रहा है और आयुर्वेद में शल्य चिकित्सा को आगे बढ़ाने के लिए वह लगातार काम करते रहे हैं। यही प्रयास आज इस सम्मान का कारण बने हैं, जिससे वह बेहद प्रसन्न हैं।
सम्मानों से सजा हुआ जीवन
डॉ. ठकराल को इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें 1991 में आयुर्वेद रत्नाकर अवॉर्ड, 1992 में आयुर्वेद बृहस्पति अवॉर्ड, 2001 में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ नई दिल्ली की फैलोशिप, 2010 में राष्ट्रीय हर्बल संरक्षण पुरस्कार और 2016 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। पद्मश्री 2026 उनके पूरे जीवन के योगदान की सबसे बड़ी पहचान है।






