लखनऊ, 24 जनवरी 2026:
यूपी में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी के बीच कांग्रेस को एक बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने साथियों के साथ कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ पार्टी छोड़ने वालों की संख्या करीब 72 बताई जा रही है। इनमें लगभग दो दर्जन पूर्व विधायक शामिल हैं। इस घटनाक्रम को यूपी की सियासत में अहम मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।
इस्तीफे के बाद जारी अपने बयान में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि वह जातिवाद और संप्रदायवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने के उद्देश्य से कांग्रेस में शामिल हुए थे लेकिन पार्टी के भीतर रहते हुए वह इस संघर्ष को आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके इस्तीफे के पीछे किसी पदाधिकारी से व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है बल्कि विचार और उद्देश्य पूरे न हो पाने का कारण है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने उनके साथ कांग्रेस छोड़ी, उनसे लगातार मशविरा किया जा रहा है। जिस राजनीतिक दल या मंच पर सभी की सहमति बनेगी उसी के साथ मिलकर आगे जनता की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में वह एक नई राजनीतिक शुरुआत कर सकते हैं।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अपने इस्तीफे की औपचारिक जानकारी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पत्र के माध्यम से दी है। यह पत्र कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को संबोधित है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उनके समर्थकों का पार्टी छोड़ना आगामी विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। इसका असर प्रदेश की चुनावी रणनीति पर साफ तौर पर पड़ सकता है।






