अयोध्या, 19 जनवरी 2026:
यूपी की रामनगरी अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक और ऐतिहासिक पड़ाव की ओर अग्रसर है। मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना को लेकर तैयारियां चल रही हैं। यह पावन अनुष्ठान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कर-कमलों से कराने की योजना है। इससे यह आयोजन धार्मिक के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व का स्वरूप ग्रहण करेगा।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति को औपचारिक आमंत्रण देने के लिए ट्रस्ट का चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन जा रहा है। प्रस्तावित कार्यक्रम के मुताबिक राष्ट्रपति 19 मार्च को अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन करेंगी और श्रीराम यंत्र की स्थापना समारोह में भाग लेंगी। इस अवसर पर हिंदू नववर्ष के शुभारंभ के उपलक्ष्य में नव संवत्सर समारोह भी आयोजित किया जाएगा।
ट्रस्ट का मानना है कि श्रीराम यंत्र की स्थापना से मंदिर के दूसरे तल की धार्मिक गतिविधियों को नई आध्यात्मिक ऊर्जा मिलेगी। यह यंत्र भगवान श्रीराम की शक्ति, मर्यादा और राष्ट्र चेतना का प्रतीक माना जाता है। इसी तल पर भविष्य में ‘राम कथाओं का मंदिर’ विकसित करने की भी योजना है। इसमें श्रीराम के जीवन, आदर्शों और लोकमानस पर उनके प्रभाव को प्रदर्शित किया जाएगा।
नव संवत्सर समारोह की तैयारियों को लेकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कार्यकर्ताओं के साथ एक अहम बैठक की। बैठक में आयोजन की रूपरेखा, विशिष्ट अतिथियों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात प्रबंधन जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। ट्रस्ट ने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सहज बनाने पर विशेष जोर दिया है।
ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और डॉ. कृष्ण मोहन रविवार को दिल्ली के लिए रवाना हुए। निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के साथ ये चारों प्रतिनिधि सोमवार को राष्ट्रपति से भेंट कर उन्हें औपचारिक निमंत्रण पत्र सौंपेंगे।
इस भव्य आयोजन में राष्ट्रपति के हाथों राम मंदिर निर्माण से जुड़े 400 श्रमिकों को सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने मंदिर निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में 4000 से अधिक लोगों के शामिल होने की संभावना है। अयोध्या एक बार फिर इतिहास, आस्था और राष्ट्र चेतना के संगम का साक्षी बनने को तैयार है।






