लखनऊ, 2 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के गाजीपुर थाना क्षेत्र के बस्तौली गांव में सोमवार को प्रदर्शन के दौरान सपा पार्षद को पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिए जाने से हालात तनावपूर्ण हो गए। आरोप है कि पुलिस ने पार्षद को घसीटते हुए थाने पहुंचाया और उनके समर्थकों को दौड़ाकर पीटा। इस कार्रवाई से नाराज बड़ी संख्या में लोग थाने के बाहर जुट गए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
मामला कोर्ट के आदेश पर एक मकान खाली कराए जाने से जुड़ा है। बस्तौली गांव निवासी रामचंद्र वाल्मीकि का परिवार 31 जनवरी से अपने घर को खाली कराए जाने के विरोध में धरने पर बैठा था। परिवार का कहना है कि वे पिछले करीब 50 वर्षों से इस मकान में रह रहे हैं। सोमवार को स्थानीय सपा पार्षद सुरेंद्र वाल्मीकि भी परिवार के समर्थन में धरने पर पहुंच गए। प्रदर्शन के दौरान पार्षद और एक अधिवक्ता सड़क पर दरी बिछाकर बैठ गए और वाल्मीकि समाज को न्याय दो के नारे लगाने लगे।
इसी दौरान पुलिस ने पार्षद को हिरासत में ले लिया। आरोप है कि पुलिस कार्रवाई के बाद स्थिति और बिगड़ गई। महिलाएं और बच्चे सड़क पर बैठकर दलित समाज को न्याय दो के नारे लगाने लगे। प्रशासन की ओर से घर का सामान बाहर निकलवाकर मकान में ताला लगा दिया गया। मौके पर राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी पहले से मौजूद थे।
पार्षद की हिरासत की खबर फैलते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोगों ने थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया और पार्षद की तत्काल रिहाई की मांग की गई। हालात बिगड़ते देख मौके पर कई थानों की पुलिस बुलानी पड़ी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पहुंचकर लोगों को शांत कराने की कोशिश की और अतिरिक्त बल तैनात किया गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई कोर्ट के आदेश के अनुसार की गई है। मामला जांच के अधीन है। दूसरी ओर, क्षेत्रवासियों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि के साथ किया गया व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद गाजीपुर थाना की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। इलाके में तनाव का माहौल बना है।






