लखनऊ/बागपत, 29 जनवरी 2026:
संविधान को समझना अब केवल पाठ्यपुस्तकों या कक्षाओं तक सीमित नहीं रहा। यूपी के बागपत जिले के बड़ौत नगर पालिका परिसर में विकसित किया गया संविधान पार्क देश में नागरिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार का एक अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया है। यह पार्क बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए सीखने, जुड़ने और स्वस्थ रहने का साझा मंच बन गया है।
पूरी तरह रिसाइकल्ड सामग्री से तैयार इस पार्क ने वेस्ट टू वेल्थ की अवधारणा को जमीन पर उतारते हुए यह साबित किया है कि कचरा भी रचनात्मकता और सामाजिक संदेश का माध्यम बन सकता है। यह पार्क केवल हरियाली या सैर-सपाटे की जगह नहीं, बल्कि एक ओपन क्लासरूम और स्ट्रीट लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया गया है, जहां संविधान के मूल मूल्य न्याय, समता, स्वतंत्रता और बंधुत्व को प्रतीकों, बोर्डों और संरचनाओं के जरिए सरल और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

पार्क का सबसे आकर्षक केंद्र है संविधान की 600 किलोग्राम वजनी विराट प्रतिकृति। 11 फीट ऊंची और 14 फीट चौड़ी यह प्रतिकृति न केवल आकार में भव्य है, बल्कि अपने संदेश में भी उतनी ही प्रभावशाली है। संविधान की मूल प्रस्तावना की यह प्रतिकृति बड़ौत नगर पालिका परिसर में स्थापित की गई है, जिसका लोकार्पण राज्य मंत्री केपी मलिक और डीएम अस्मिता लाल ने किया।
डीएम अस्मिता लाल के अनुसार पार्क में स्थापित महात्मा गांधी का चरखा आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी आंदोलन की भावना को जीवंत करता है। वहीं बागपत के प्राचीन नाम ‘व्याघप्रस्थ’ की थीम पर विकसित वाटर कियोस्क स्थानीय इतिहास और संस्कृति से जुड़ाव का संदेश देता है।
संविधान पार्क में अधिकारों और कर्तव्यों से जुड़े सूचना बोर्ड, बुक प्वाइंट, लाइब्रेरी और स्वास्थ्य गतिविधियों की सुविधाएं मौजूद हैं। यहां आने वाला व्यक्ति न केवल शारीरिक रूप से सक्रिय होता है, बल्कि मानसिक और बौद्धिक रूप से भी समृद्ध होता है।

प्रशासन के अनुसार यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस सोच को दर्शाती है, जिसमें विकास के साथ संस्कार, आधुनिकता के साथ संविधान और सेहत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ा गया है। आज बागपत का संविधान पार्क केवल जिले की पहचान नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है।






