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यह जनतंत्र नहीं, भ्रमतंत्र है… शंकराचार्य अपमान के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा

माघ मेले में हुई घटना को सनातन परंपरा, संत समाज और ब्राह्मण समाज के आत्मसम्मान पर सीधा हमला बताया, यूजीसी के नए नियमों का भी खुलकर किया विरोध

लखनऊ/बरेली, 26 जनवरी 2026:

प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने गणतंत्र दिवस के दिन अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस अप्रत्याशित फैसले से प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।

अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुई घटना को सनातन परंपरा, संत समाज और ब्राह्मण समाज के आत्मसम्मान पर सीधा हमला बताया है। उनका आरोप है कि स्थानीय प्रशासन ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों के साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर उसकी चोटी और शिखा पकड़कर घसीटा गया। ये धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादा का गंभीर उल्लंघन है।

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सिटी मजिस्ट्रेट ने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए अपने सात पन्नों के इस्तीफे में लिखा है कि मौजूदा व्यवस्था में न जनतंत्र बचा है और न ही गणतंत्र, बल्कि भ्रमतंत्र कायम हो गया है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की है। इस्तीफे में उन्होंने स्वयं को उत्तर प्रदेश सिविल सेवा 2019 बैच का राजपत्रित अधिकारी बताते हुए यह भी उल्लेख किया कि उनकी शिक्षा-दीक्षा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हुई है।

अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि प्रयागराज की घटना न केवल चिंताजनक है बल्कि यह दर्शाती है कि वर्तमान सरकार और स्थानीय प्रशासन साधु-संतों की अस्मिता और ब्राह्मण समाज के सम्मान के प्रति संवेदनशील नहीं है। उन्होंने इसे एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को झकझोर देने वाला बताया।

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इस्तीफे के साथ-साथ अलंकार अग्निहोत्री ने यूजीसी के नए नियमों का भी खुलकर विरोध किया है। सोमवार को उनकी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसमें वे हाथ में पोस्टर लिए नजर आए। पोस्टर पर लिखा था…#UGC_RollBack, काला कानून वापस लो और शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान। गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर दिए गए इस इस्तीफे ने प्रशासनिक सेवा में वैचारिक असंतोष और विरोध के नए संकेत दे दिए हैं।

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