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यूपी कैबिनेट का मानवीय फैसला…पूर्वी पाकिस्तान से आए हिंदू बंगाली परिवारों को मिलेगा स्थायी ठिकाना

मेरठ के मवाना झील किनारे रह रहे थे 99 परिवार, कानपुर देहात में होगा पुनर्वासन, 30 साल के पट्टे पर मिलेगी जमीन, मुजफ्फरनगर की मोरना चीनी मिल के आधुनिकीकरण का लिया गया फैसला

लखनऊ, 29 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर दशकों से प्रदेश में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के लिए अहम और मानवीय फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मेरठ से जुड़े इस संवेदनशील मामले को मंजूरी दी गई।

यह प्रकरण मेरठ जिले की मवाना तहसील के ग्राम नंगला गोसाई से जुड़ा है, जहां पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवार झील की भूमि पर लंबे समय से रह रहे थे। पर्यावरण संरक्षण और मानवीय पहल को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन परिवारों के स्थायी पुनर्वासन का निर्णय लिया है।

कैबिनेट के फैसले के मुताबिक, सभी 99 परिवारों को कानपुर देहात जिले की रसूलाबाद तहसील में बसाया जाएगा। ग्राम भैंसाया में पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज 11.1375 हेक्टेयर भूमि पर 50 परिवारों को तथा ग्राम ताजपुर तरसौली में 10.530 हेक्टेयर भूमि पर शेष 49 परिवारों को आवंटित किया जाएगा। प्रत्येक परिवार को आधा एकड़ भूमि मिलेगी।

यह भूमि 30 साल के पट्टे पर दी जाएगी, जिसे आगे दो बार 30-30 वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकेगा। इस तरह अधिकतम 90 वर्ष तक परिवारों को रहने और बसने की सुरक्षा मिलेगी। सरकार के इस फैसले से लंबे समय से अस्थायी हालात में गुजर-बसर कर रहे इन परिवारों को अब एक स्थायी ठिकाना, सम्मानजनक जीवन और भविष्य की मजबूती मिल सकेगी।

गन्ना किसानों के लिए भी राहत की खबर, मोरना में चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ेगी

कैबिनेट बैठक में किसानों से जुड़े एक और बड़े फैसले पर मुहर लगी। मुजफ्फरनगर के मोरना स्थित गंगा किसान सहकारी चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने और मिल को नई तकनीक से लैस करने का निर्णय लिया गया है।

मिल की मौजूदा क्षमता 2500 टीसीडी से बढ़ाकर पहले 3500 टीसीडी और इसके बाद 5000 टीसीडी की जाएगी। पुरानी मशीनरी और जर्जर प्लांट के कारण किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था, लेकिन नई आधुनिक तकनीक से उत्पादन बढ़ेगा और कामकाज ज्यादा बेहतर होगा।

पेराई क्षमता बढ़ने से गन्ना किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। समय पर गन्ना भुगतान, बेहतर कीमत और आय में बढ़ोतरी की उम्मीद मजबूत होगी। साथ ही मिल के आधुनिकीकरण से क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और सहकारी व्यवस्था पर किसानों का भरोसा और मजबूत होगा।

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