लखनऊ, 8 जनवरी 2026:
प्रदेश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बेहतर और सुलभ इलाज मिल रहा है। सरकार ने कैशलेस इलाज के साथ-साथ अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। इसका असर यह हुआ है कि बीते एक साल में क्लेम निस्तारण की रफ्तार तेज हुई है और लंबित मामलों में बड़ी कमी आई है।
पुराने और नए दोनों क्लेम का हो रहा निस्तारण
स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि अस्पतालों से आने वाले क्लेम को पारदर्शी और तेज तरीके से निपटाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। जनवरी 2025 में जहां क्लेम पेंडेंसी 10 लाख 75 हजार तक पहुंच गई थी, वहीं दिसंबर 2025 तक यह घटकर करीब 3 लाख रह गई। हर महीने औसतन 2 लाख से ज्यादा क्लेम आते हैं, इसके बावजूद पुराने मामलों के साथ नए क्लेम भी नियमित रूप से निपटाए जा रहे हैं। इसका मकसद साफ है कि सूचीबद्ध अस्पताल बिना किसी झंझट के आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज करें।

मेडिकल ऑडिट सिस्टम हुआ मजबूत
क्लेम प्रक्रिया को और तेज व आसान बनाने के लिए मेडिकल ऑडिट व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
एसीईओ पूजा यादव के अनुसार मेडिकल ऑडिटरों की संख्या 40 से बढ़ाकर 130 कर दी गई है। इससे क्लेम जांच की रफ्तार तेज हुई है। इसके साथ ही क्लेम प्रोसेसिंग डेस्क की संख्या भी 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है। कोशिश यह है कि अस्पतालों को 30 दिन के भीतर भुगतान मिल जाए। इसके लिए नियमित समीक्षा बैठकें हो रही हैं और लंबित मामलों पर नजर रखी जा रही है।
एक साल में 4,649 करोड़ का भुगतान
जनवरी 2025 से दिसंबर 2025 तक आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों को कुल 4,649 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इससे साफ है कि सरकार सिर्फ इलाज की व्यवस्था ही नहीं कर रही, बल्कि अस्पतालों के आर्थिक हितों का भी पूरा ख्याल रख रही है, ताकि गरीब मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके।
गरीब मरीजों को मिला बड़ा फायदा
क्लेम पेंडेंसी में कमी, समय पर भुगतान और मजबूत ऑडिट सिस्टम से अस्पतालों का भरोसा बढ़ा है। इसका सीधा फायदा गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिला है। अब उन्हें इलाज के लिए न कर्ज लेना पड़ता है और न ही जमीन-जायदाद बेचने की मजबूरी रह गई है। आयुष्मान योजना उनके लिए सुकून और राहत बनकर सामने आई है।






