लखनऊ, 17 जनवरी 2026:
यूपी को गरीबी मुक्त बनाने की दिशा में योगी सरकार एक और महत्वाकांक्षी और नवाचारपूर्ण पहल करने जा रही है। जीरो पावर्टी अभियान को जमीनी स्तर पर और प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश सरकार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को इस मिशन से जोड़ने की तैयारी में है। इसके तहत उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू साइन कर उन्हें सीधे गांवों और निर्धन परिवारों के सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
योजना के अनुसार हर विश्वविद्यालय और कॉलेज जीरो पावर्टी अभियान के अंतर्गत 10 से 15 ग्राम पंचायतों को गोद लेंगे। इन ग्राम पंचायतों में चिन्हित अत्यंत गरीब परिवारों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए शिक्षा, आजीविका, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े कार्य किए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में संस्थानों के एनएसएस, एनसीसी, एमएसडब्ल्यू (सोशल वर्क) सहित विभिन्न पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्र वालंटियर के रूप में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
इस अभिनव पहल की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में राजधानी लखनऊ से की जाएगी। पायलट के सकारात्मक और व्यावहारिक परिणाम सामने आने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। प्रमुख सचिव नियोजन एवं जीरो पावर्टी अभियान के नोडल अधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि अभियान के तहत छात्रों द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत में चिन्हित परिवारों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा। इस सर्वे के आधार पर आजीविका संवर्धन, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए माइक्रो-प्लानिंग तैयार की जाएगी।
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए हर संस्थान में एक नोडल शिक्षक की तैनाती की जाएगी। वे अभियान की निगरानी करेंगे और गांवों में चल रहे कार्यक्रमों का मार्गदर्शन करेंगे। छात्र गांवों में जाकर जीरो पावर्टी परिवारों की जरूरतों का आकलन करेंगे और युवाओं को स्किलिंग, अप्रेंटिसशिप और प्लेसमेंट से जोड़ने में मदद करेंगे। साथ ही पात्र लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन प्रक्रिया में भी सहयोग दिया जाएगा जिससे कोई भी परिवार लाभ से वंचित न रह जाए।
इसके अलावा योग्य लाभार्थियों की नियमित मेंटरिंग और प्रगति की ट्रैकिंग की जाएगी। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जीरो पावर्टी अभियान के तहत सभी पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का 100 प्रतिशत कवरेज मिले। योजना को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन और उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके लिए डीएम स्तर पर एमओयू और त्रैमासिक समीक्षा बैठकें आयोजित होंगी, ताकि कार्यों की प्रगति की समीक्षा कर समय-समय पर आवश्यक सुधार किए जा सकें।





