लखनऊ, 26 जनवरी 2026:
यूपी में जल संकट से निपटने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार की लगभग नौ वर्षों की रणनीति अब जमीन पर असर दिखाने लगी है। भूजल संरक्षण को केवल पर्यावरण तक सीमित न रखकर खेती, ग्रामीण जीवन और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा से जोड़ने का जो प्रयास किया गया उसने प्रदेश की जल नीति को नई दिशा दी है। ‘अटल भूजल योजना’, ‘कैच द रेन’ और ‘जल संचय जन भागीदारी’ जैसे अभियानों ने उत्तर प्रदेश में जल प्रबंधन को मजबूत आधार प्रदान किया है।
केंद्र सरकार के सहयोग से लागू अटल भूजल योजना के तहत यूपी देश के उन सात राज्यों में शामिल है जहां जल तनावग्रस्त क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से प्रदेश में लगभग 26,946 हेक्टेयर क्षेत्र में जल के सक्षम और संतुलित उपयोग को बढ़ावा दिया गया है। इसके साथ ही 550 डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर और 392 डिजिटल व एनालॉग जल स्तर संकेतक लगाए गए हैं। इससे भूजल स्तर की नियमित और सटीक निगरानी संभव हो सकी है।

योगी सरकार ने तकनीक आधारित जल प्रबंधन को अपनी नीति का अहम हिस्सा बनाया है। डिजिटल निगरानी प्रणाली के जरिए अब भूजल दोहन और उसके पुनर्भरण पर लगातार नजर रखी जा रही है। पहले जहां कई इलाकों में जल स्तर गिरने की जानकारी देर से मिलती थी, वहीं अब रियल टाइम आंकड़ों के आधार पर प्रशासन त्वरित निर्णय ले पा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे जल प्रबंधन अधिक प्रभावी, पारदर्शी और वैज्ञानिक हुआ है।
वर्षा जल संचयन को लेकर भी प्रदेश में बड़े पैमाने पर काम हुआ है। जल शक्ति अभियान ‘कैच द रेन’ और ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तहत हजारों जल संरचनाओं का निर्माण किया गया। राष्ट्रीय स्तर पर पूरे किए गए 39.60 लाख कृत्रिम भूजल पुनर्भरण और जल संचयन कार्यों का सीधा लाभ उत्तर प्रदेश के कई जिलों को मिला है। तालाबों, कुओं और पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन से भूजल स्तर को नई ताकत मिली है।
इन प्रयासों का सबसे बड़ा फायदा किसानों और ग्रामीण आबादी को मिला है। बेहतर भूजल उपलब्धता से सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई है और पेयजल संकट वाले क्षेत्रों में राहत नजर आ रही है। सरकार का कहना है कि जल सुरक्षा से खेती को स्थायित्व मिला है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सशक्त हुई है।
डबल इंजन सरकार के मॉडल के तहत केंद्र और राज्य के समन्वय से उत्तर प्रदेश को जल आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। भूजल संरक्षण, पुनर्भरण और निगरानी को विकास से जोड़कर देखा जा रहा है जिससे आने वाले वर्षों में जल संकट दोबारा सिर न उठा सके। योगी सरकार की जल नीति प्रदेश के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक मजबूत आधार बनती दिखाई दे रही है।






