लखनऊ, 27 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया है। निलंबन के बाद उन्हें शामली के कलेक्टर कार्यालय से अटैच किया गया है। पूरे मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली को सौंपी गई है। इससे पहले सोमवार को अलंकार अग्निहोत्री ने सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देकर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी थी। आइए विस्तार से जानते हैं उनके संघर्ष की कहानी…
कानपुर से PCS तक का सफर
पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। वह 2019 बैच के PCS अधिकारी हैं और वर्तमान में बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद पर तैनात थे। इससे पहले अलंकार उन्नाव, बलरामपुर और एटा जैसे जिलों में SDM के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा लखनऊ में वह सहायक नगर आयुक्त के पद पर भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

संघर्षों में बीता शुरुआती जीवन
अलंकार अग्निहोत्री का परिवार इस समय भी कानपुर में ही रहता है। बताया जाता है कि उनका जीवन शुरू से ही संघर्षों से भरा रहा है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मेहनत और लगन के दम पर प्रशासनिक सेवा में अपनी जगह बनाई और PCS अधिकारी बनने तक का सफर तय किया।
कम उम्र में शुरू हुआ संघर्ष
अलंकार अग्निहोत्री के जीवन का संघर्ष बहुत कम उम्र में ही शुरू हो गया था। जब वे मात्र साढ़े दस वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। घर के सबसे बड़े बेटे होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उनकी मां गीता अग्निहोत्री ने कठिन हालात के बावजूद बच्चों की शिक्षा और परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी।

IIT से पढ़ाई, फिर प्राइवेट नौकरी
अलंकार ने कानपुर से 12वीं तक की पढ़ाई की और यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में पूरे प्रदेश में 21वां स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने आईटी बीएचयू, जो अब आईआईटी बीएचयू है, से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। सिविल सेवा में जाने की इच्छा होने के बावजूद परिवार की जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने एक आईटी कंपनी में कंसल्टेंट के रूप में नौकरी शुरू की।
सपनों के लिए छोड़ी सुरक्षित नौकरी
साल 2015 में जब भाई बहनों की शादी और सेटलमेंट हो गया, तब अलंकार ने करीब 10 साल पुरानी सुरक्षित नौकरी छोड़ने का साहसिक फैसला लिया। उन्होंने पूरी तरह पीसीएस की तैयारी शुरू की। इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई पर ध्यान दिया।

सटीक प्लानिंग ने दिलाई पहली ही बार में सफलता
अलंकार अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी आस्था मिश्रा और अपनी मां को देते हैं। उन्होंने तैयारी से पहले एक साल की सैलरी बचाकर आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की थी, ताकि परिवार पर कोई दबाव न पड़े। उनकी मेहनत और अनुशासन का नतीजा यह रहा कि उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीपीसीएस परीक्षा पास कर डिप्टी कलेक्टर यानी एसडीएम का प्रतिष्ठित पद हासिल किया।






