न्यूज डेस्क, 18 जून 2026:
सुबह के समय पार्कों, मैदानों और सामुदायिक केंद्रों में अलग-अलग उम्र के लोग योग करते दिखाई देते हैं। कहीं बच्चे आसन सीख रहे हैं, कहीं युवा सूर्य नमस्कार कर रहे तो कहीं बुजुर्ग प्राणायाम के जरिए खुद को सक्रिय और ऊर्जावान बनाए रखने में जुटे हैं। यह तस्वीर अब किसी एक शहर तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे देश में योग के प्रति बढ़ती जागरूकता की झलक बन चुकी है।
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस है और उससे पहले देश में योग को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है। योग दिवस से पहले पूरे सप्ताह को योग सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है जिसके जरिए लोगों को योग के महत्व और उसके लाभों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। इस बार योग दिवस की थीम ‘योगा फॉर हेल्थी एजिंग’ यानी स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग है।

स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न संस्थानों में बड़े स्तर पर योग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जगह-जगह योग शिविर लग रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प ले रहे हैं।
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में भारत में योग के प्रति लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां योग को केवल एक पारंपरिक अभ्यास माना जाता था वहीं आज इसे स्वस्थ जीवन की कुंजी समझा जाने लगा है। बढ़ता तनाव, भागदौड़ भरी जिंदगी, मोबाइल और लैपटॉप के सामने बीतते लंबे घंटे एवं बदलती जीवनशैली ने लोगों को फिर से योग की तरफ लौटने पर मजबूर किया है।
योग की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह किसी एक उम्र या वर्ग तक सीमित नहीं है। स्कूल जाने वाला बच्चा हो या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा विद्यार्थी, गृहिणी हो या दफ्तर में घंटों काम करने वाला कर्मचारी, खिलाड़ी हो या बुजुर्ग, योग हर किसी की जरूरत के हिसाब से लाभ पहुंचाता है।

बच्चों के लिए योग केवल शरीर को लचीला बनाने का माध्यम नहीं है बल्कि यह उनकी एकाग्रता और ऊर्जा को भी बढ़ाता है। वहीं पढ़ाई के दबाव और प्रतियोगिता के दौर से गुजर रहे विद्यार्थियों के लिए योग तनाव कम करने और ध्यान केंद्रित रखने का प्रभावी साधन बन रहा है। युवाओं के लिए योग फिट रहने का नया मंत्र बन चुका है। जिम में घंटों पसीना बहाने के साथ बड़ी संख्या में युवा मानसिक शांति और बेहतर फिटनेस के लिए योग को अपना रहे हैं।
गृहिणियों के लिए योग दिनभर की जिम्मेदारियों के बीच खुद के लिए निकाला गया वह समय है जो उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। वहीं कामकाजी महिलाओं और कॉरपोरेट जगत में काम करने वाले लोगों के लिए योग तनाव, थकान, कमर दर्द और गर्दन दर्द जैसी समस्याओं से राहत दिलाने का माध्यम बन रहा है।
खिलाड़ियों के लिए योग किसी वरदान से कम नहीं माना जाता। यह शरीर की लचक बढ़ाता है, संतुलन बेहतर करता है और एकाग्रता के माध्यम से उनके प्रदर्शन को निखारने में मदद करता है। वहीं बढ़ती उम्र के साथ शरीर में आने वाली जकड़न और कमजोरी से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए योग सक्रिय और स्वस्थ जीवन जीने का सहारा बन रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योग अभ्यास उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, तनाव, चिंता, अनिद्रा और पीठ दर्द जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। यही वजह है कि आज योग केवल एक अभ्यास नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का पर्याय बनता जा रहा है। हालांकि गंभीर बीमारियों में चिकित्सकीय उपचार के साथ ही योग को अपनाने की सलाह दी जाती है।
शायद यही कारण है कि हजारों साल पुरानी भारत की यह परंपरा आज दुनिया भर में सम्मान पा रही है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक आयोजन नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश है। बढ़ती जागरूकता और लोगों की भागीदारी यह दर्शाती है कि योग अब केवल व्यायाम नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का माध्यम बनता जा रहा है।






