
लखनऊ, 10 जुलाई 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ के पूरी तरह विकसित इलाके में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। लंबे इंतजार के बाद आवास विकास परिषद अगस्त में मोहनलालगंज की न्यू जेल रोड पर बहुप्रतीक्षित सौमित्र विहार आवासीय योजना लॉन्च करने की तैयारी में है। इस योजना के लिए रेरा में पंजीकरण का प्रस्ताव भेज दिया गया है। रेरा की मंजूरी मिलते ही अगस्त में भूखंडों का पंजीकरण शुरू हो जाएगा।

पहले चरण में उपलब्ध होंगे करीब 2200 प्लाट
पहले चरण में करीब 2200 भूखंड लोगों के लिए उपलब्ध होंगे। इससे लगभग एक लाख लोगों को आवासीय सुविधा मिलने का रास्ता खुलेगा। परिषद के अधिकारियों के मुताबिक रेरा में पंजीकरण के लिए गत सप्ताह आवेदन किया गया था। दो-तीन हफ्ते में रेरा की मंजूरी मिलते ही योजना का पंजीकरण शुरू हो जाएगा। इस योजना को आवास विकास बोर्ड से मंजूरी मिल चुकी है।
जमीन देने वाले किसानों को विकसित प्लाट आवंटित
करीब 560 एकड़ में विकसित की जा रही इस महत्वाकांक्षी योजना को परिषद ने दो वर्ष पहले स्वीकृत किया था। इसे दो चरणों में विकसित किया जाएगा। पहले इसे पिछले वर्ष 13 जनवरी को लॉन्च किया जाना था लेकिन जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया पूरी न होने से योजना अटक गई थी। अब यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लैंड पूलिंग नीति के तहत जिन किसानों से जमीन ली गई थी उन्हें विकसित भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इसके बाद योजना से जुड़ी सभी कानूनी बाधाएं दूर हो गई हैं।
योजना में 2092 आवासीय और 169 व्यावसायिक भूखंड
सौमित्र विहार में कुल 2092 आवासीय और 169 व्यावसायिक भूखंड होंगे। 40 से 300 वर्गमीटर तक के प्लॉट उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना में 15 सेक्टर विकसित किए जा रहे हैं। पहले चरण में दो सेक्टरों में भूखंडों का विकास किया जा रहा है। यहां की सड़कें वृंदावन योजना की तर्ज पर 9, 12, 18 और 24 मीटर चौड़ी होंगी। योजना के लिए मोहारी कला, सिठौली कला और सिठौली खुर्द गांवों की जमीन ली गई है।
जमीन का प्रस्तावित रेट करीब 2500 रुपये प्रति वर्गफीट
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत है। यहां जमीन का प्रस्तावित रेट करीब 2500 रुपये प्रति वर्गफीट रखा गया है। यह एलडीए की आईटी सिटी योजना के प्रस्तावित करीब 4000 रुपये प्रति वर्गफीट के मुकाबले काफी कम है। परिषद का कहना है कि लैंड पूलिंग के तहत जमीन मिलने से उसे खरीद पर भारी खर्च नहीं करना पड़ा। केवल विकास कार्यों पर खर्च होने के कारण लोगों को विकसित क्षेत्र में अपेक्षाकृत सस्ती दर पर भूखंड उपलब्ध कराए जा सकेंगे।






