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‘तेजस’ पर अब Sprite के रंग, 19 अगस्त से बदलेगा ट्रेन का अंदाज, जानिए क्या है Branding Deal व रेलवे में नया Commercial प्रयोग

IRCTC ने विज्ञापन अधिकार कोका-कोला के Sprite ब्रांड को देने का लिया फैसला, स्टेशनों से लेकर ट्रेन के कोच तक दिखेगी ब्रांड की मौजूदगी रूट, किराया, संचालन या यात्री सुविधाओं में बदलाव नहीं, मामला सिर्फ Commercial Branding से जुड़ा फिर भी लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस की ब्रांडिंग को लेकर छिड़ी नई बहस, 19 अगस्त से 11 नवंबर तक रहेगी Sprite branding deal

न्यूज डेस्क, 17 अगस्त 2026:

लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस एक बार फिर चर्चा में है। इस बार वजह ट्रेन का रूट या किराया नहीं, बल्कि इसकी नई ब्रांडिंग है। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) ने ट्रेन की Branding Rights को Cold Drink ब्रांड Sprite को दिया है। इसके बाद 19 अगस्त से ट्रेन को स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस के नाम से एनाउंस किया जाएगा।

तेजस के लिए कितने समय का है यह करार

रिपोर्टों के मुताबिक Sprite को यह Branding Rights 19 अगस्त से 11 नवंबर 2026 तक के लिए दिए गए हैं। यानी यह व्यवस्था करीब तीन महीने तक रहने वाली है। इस अवधि के दौरान ट्रेन की ब्रांडिंग में Sprite की मौजूदगी दिखाई देगी।

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किन स्टेशनों पर सुनाई देगी नई घोषणा

इस ब्रांडिंग के तहत उत्तर पूर्व रेलवे के दायरे में आने वाले लखनऊ जंक्शन, कानपुर, गाजियाबाद व नई दिल्ली स्टेशनों पर ट्रेन की घोषणा में स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस नाम का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। इससे यात्रियों को स्टेशन अनाउंसमेंट में भी बदला हुआ नाम सुनाई देगा।

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तेजस ट्रेन के बाहर व अंदर होंगे बदलाव

Sprite की Branding सिर्फ नाम तक सीमित नहीं रहने वाली है। ट्रेन के बाहरी हिस्से, कोच के भीतर, सीटों, खिड़कियों व दूसरे तय विज्ञापन स्थानों पर ब्रांडिंग की जा सकती है। यानी यह सामान्य विज्ञापन की तुलना में बड़ा Commercial Branding अभियान होगा।

मालिकाना हक न बदलने से ट्रेन का किराया बढ़ाने पर कोई पुष्टि नहीं

फिलहाल इस Branding Deal का ट्रेन के किराए से सीधा संबंध नहीं है। यात्री किराए में बदलाव की बात सामने नहीं आई है। ट्रेन का संचालन पहले की तरह IRCTC के तहत ही जारी रहेगा। Sprite के नाम से Branding होने का मतलब ट्रेन का मालिकाना हक किसी निजी कंपनी को देना नहीं है। यह एक Commercial Branding Deal है। ट्रेन के संचालन की जिम्मेदारी IRCTC के पास ही रहती है, जबकि रेलवे के ट्रैक व स्टेशन भारतीय रेलवे के नियंत्रण में हैं।

तेजस के जरिये IRCTC को मिलेगा Non-Fare Revenue

रेलवे व उसकी सहयोगी संस्थाएं टिकट से मिलने वाली कमाई के अलावा Non-Fare Revenue बढ़ाने के रास्ते तलाशती रही हैं। ट्रेन की Branding इसी मॉडल का हिस्सा मानी जा रही है। कंपनियां विज्ञापन के लिए भुगतान करती हैं, बदले में उन्हें ट्रेन, स्टेशन या दूसरे यात्री संपर्क वाले स्थानों पर ब्रांड दिखाने का मौका मिलता है।

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तेजस एक्सप्रेस पहले भी क्यों रही विवाद में

लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस की शुरुआत अक्टूबर 2019 में हुई थी। उस समय इसे देश की पहली निजी ट्रेन के तौर पर पेश किए जाने को लेकर रेलवे कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया था। रेलवे यूनियनों ने इसे निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया था।

छह साल बाद फिर क्यों उठा निजीकरण का सवाल

अब ट्रेन के नाम के साथ एक बड़े Consumer Brand को जोड़ने की खबर ने पुरानी बहस को नया मुद्दा दे दिया है। हालांकि मौजूदा मामला निजी संचालन से ज्यादा Commercial Branding से जुड़ा है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ रहा है कि सार्वजनिक परिवहन में ब्रांडिंग की सीमा आखिर कहां तक होनी चाहिए।

क्या यह सिर्फ नाम बदलने का मामला है ?

तकनीकी तौर पर इसे स्थायी नाम बदलना कहना सही नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 19 अगस्त से 11 नवंबर तक Branding Deal लागू रहने वाली है। इसका मतलब यह हुआ कि तेजस एक्सप्रेस का मूल परिचालन नाम या ट्रेन नंबर स्थायी रूप से बदलने की बात सामने नहीं आई है।

तेजस को Sprite से जोड़ने पर विवाद क्यों ?

इस फैसले पर दो तरह की राय सामने आ रही है। आलोचकों का कहना है कि रेलवे जैसी सार्वजनिक व्यवस्था के साथ किसी Consumer Brand को जोड़ना व्यावसायीकरण की सीमा को आगे बढ़ाता है। दूसरी तरफ समर्थकों का तर्क है कि ट्रेन की ब्रांडिंग से यात्रियों पर अतिरिक्त किराए का बोझ नहीं पड़ता, जबकि रेलवे को Non-Fare Revenue मिल सकता है।

क्या Cold Drink से Branding में सेहत को नुकसान होगा ?

सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य से जुड़े सवाल भी उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों का तर्क है कि सार्वजनिक परिवहन में शीतल पेय ब्रांड के बड़े स्तर पर प्रचार को लेकर सावधानी बरती जानी चाहिए। दूसरी तरफ यह भी तर्क दिया जा रहा है कि Advertising Deal का मकसद ब्रांड प्रचार है, ट्रेन की यात्री सेवाओं में कोई बदलाव करना नहीं।

तेजस के बाद क्या दूसरी ट्रेनों के नाम भी ब्रांड से जुड़ सकते हैं ?

यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। अगर तेजस एक्सप्रेस की Branding से IRCTC को अच्छा Commercial Return मिलता है, तो भविष्य में दूसरी प्रीमियम ट्रेनों के लिए भी ऐसे मॉडल पर विचार हो सकता है। अभी इसे लेकर किसी दूसरी ट्रेन के नाम की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं है।

FAQ:

स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस क्या है ?

स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस नाम लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस की प्रस्तावित Commercial Branding से जुड़ा है। इज़के तहत Sprite को सीमित अवधि के लिए ट्रेन की Branding Rights दिए गए हैं।

स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस कब से सुनाई देगी ?

रिपोर्टों के अनुसार 19 अगस्त 2026 से यह Branding शुरू होगी। प्रस्तावित अवधि 11 नवंबर 2026 तक बताई गई है।

क्या तेजस एक्सप्रेस का ट्रेन नंबर बदलेगा ?

नहीं। उपलब्ध जानकारी में ट्रेन नंबर 82501 और 82502 में बदलाव की बात सामने नहीं आई है। Branding Deal का संबंध मुख्य रूप से नाम व विज्ञापन से है।

क्या लखनऊ-दिल्ली तेजस एक्सप्रेस का किराया बढ़ेगा ?

इस Branding के चलते किराया बढ़ाने की जानकारी सामने नहीं आई है। यात्रियों के लिए किराया, रूट या सामान्य संचालन में बदलाव की बात रिपोर्टों में नहीं कही गई है।

क्या तेजस एक्सप्रेस का निजीकरण हो गया ?

नहीं। Sprite Branding को ट्रेन के निजीकरण से अलग समझना होगा। यह विज्ञापन व Commercial Branding से जुड़ा करार बताया जा रहा है।

ट्रेन में Sprite की Branding कहां दिखेगी ?

ट्रेन के बाहरी हिस्से के साथ कोच के अंदर सीटों, खिड़कियों व दूसरे विज्ञापन स्थानों पर Branding की जा सकती है। स्टेशनों पर ट्रेन की घोषणा में भी ब्रांड नाम का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है।

इस डील से IRCTC को क्या मिलेगा ?

इस तरह की Branding से IRCTC को Non-Fare Revenue हासिल करने का रास्ता मिलता है। यानी कमाई सिर्फ टिकट बिक्री पर निर्भर नहीं रहती।

क्या यह भारतीय रेलवे की पहली ऐसी ट्रेन है ?

इसे पहली ऐसी ट्रेन बताया जा रहा है जिसके आधिकारिक सार्वजनिक नाम के साथ किसी बड़े Consumer Brand की Branding जोड़ी जा रही है। इस दावे की अंतिम पुष्टि के लिए IRCTC की आधिकारिक जानकारी को आधार बनाना जरूरी होगा।

सबसे बड़ा सवाल- इस डील के 3 महीने से निकलेंगे भविष्य के रास्ते

स्प्राइट तेजस एक्सप्रेस की Branding तीन महीने की सीमित अवधि के लिए बताई जा रही है, लेकिन इसने रेलवे के Commercial Branding मॉडल को लेकर बड़ी बहस जरूर शुरू कर दी है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में दूसरी ट्रेनों की Branding को लेकर भी नए रास्ते खुल सकते हैं। फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यही होगा कि 19 अगस्त से स्टेशन पर तेजस एक्सप्रेस के साथ Sprite का नाम सुनाई दे सकता है।

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Anand Sharma

आनंद शर्मा 30 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। ‘राष्ट्रीय सहारा’ व ‘हिंदुस्तान’ दैनिक समाचार पत्र में फील्ड रिपोर्टिंग के साथ सम्पादन का काम भी चलता रहा। जिला स्तर पर संवाददाता और ब्यूरो प्रमुख के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। इस दौरान विख्यात… More »

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