विजयदशमी पर होगी बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की घोषणा, उत्सव डोलियों के शीतकालीन प्रवास का कार्यक्रम भी होगा तय
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी ने दी जानकारी, 20 अक्टूबर को भगवान बदरीविशाल को भोग अर्पित करने के बाद होगा समारोह का आयोजन, दशमी तिथि व विजय मुहूर्त में धर्माधिकारी और वेदपाठी करेंगे पंचांग गणना

राजकिशोर तिवारी
देहरादून, 16 अक्टूबर 2026ः
उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए कब बंद होंगे, इसका फैसला विजयदशमी के पावन पर्व पर 20 अक्टूबर को होगा। बद्रीनाथ मंदिर परिसर में आयोजित होने वाले भव्य धार्मिक समारोह में पंचांग गणना के बाद कपाट बंद करने की तारीख की विधिवत घोषणा की जाएगी। साथ ही कपाट बंद होने से पहले संपन्न होने वाली पंच पूजाओं और भगवान की उत्सव डोलियों के शीतकालीन प्रवास का कार्यक्रम भी तय किया जाएगा।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ के अनुसार 20 अक्टूबर को दोपहर में भगवान बदरीविशाल को भोग अर्पित करने के बाद मंदिर परिसर में धार्मिक समारोह आयोजित होगा। दशमी तिथि और विजय मुहूर्त में धर्माधिकारी एवं वेदपाठी पंचांग गणना करेंगे। इसी धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान बदरीविशाल के कपाट बंद होने की तिथि निर्धारित कर सार्वजनिक रूप से घोषित की जाएगी।
नवरात्र अनुष्ठानों का भी होगा समापन
विजयदशमी के अवसर पर बद्रीनाथ मंदिर परिसर में नवरात्र और उर्वशी माता की पूजा-अर्चना का समापन हवन-यज्ञ के साथ किया जाएगा। इसी दिन शीतकाल के लिए कपाट बंद होने से पहले होने वाली पंच पूजाओं की तिथियां और कार्यक्रम भी निर्धारित किए जाएंगे। इन धार्मिक अनुष्ठानों के साथ बद्रीनाथ धाम की यात्रा के शीतकालीन समापन की तैयारियों को औपचारिक दिशा मिलेगी।
शीतकालीन प्रवास की तिथियों पर भी लगेगी मुहर
कपाट बंद होने की तारीख तय होने के साथ भगवान उद्धव और कुबेर की योग बदरी व पांडुकेश्वर प्रस्थान यात्रा का कार्यक्रम भी निर्धारित किया जाएगा। वहीं, भगवान गरुड़ और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी के ज्योतिर्मठ स्थित नृसिंह मंदिर प्रस्थान की तिथियां भी तय होंगी। इन परंपराओं के साथ शीतकाल में भगवान की पूजा-अर्चना और धार्मिक व्यवस्थाओं के संचालन की रूपरेखा स्पष्ट होगी।
समारोह में जुटेंगे पदाधिकारी और श्रद्धालु
कपाट बंद होने की तारीख निर्धारण समारोह में बद्रीनाथ धाम के रावल, बीकेटीसी के पदाधिकारी, मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़, अधिकारी-कर्मचारी, हक-हकूकधारी, तीर्थ पुरोहित और श्रद्धालु मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर आगामी यात्रा वर्ष 2027 के लिए बद्रीनाथ धाम की भंडार व्यवस्था के संचालन के लिए पगड़ी भेंट करने की पारंपरिक रस्म भी निभाई जाएगी।






