UP MLC Election : आज थमेगा प्रचार, 23 को वोटिंग, भाजपा-सपा के लिए सत्ता का सेमीफाइनल
प्रदेश सरकार के एक दर्जन मंत्रियों और दोनों दलों के 100 से अधिक सांसद-विधायकों ने झोंकी ताकत, 11 सीटों के नतीजों से विधानसभा चुनाव से पहले भांपा जाएगा सियासी मूड

लखनऊ, 21 अक्टूबर 2026:
यूपी में विधान परिषद (एमएलसी) की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन खंड की 11 सीटों पर चुनावी जंग निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। आज शाम प्रचार थमने के साथ ही प्रत्याशियों की पूरी ताकत मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने पर होगी। 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे इस चुनाव को भाजपा और सपा के लिए सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। यही वजह है कि सीमित सीटों के बावजूद दोनों दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। योगी सरकार के करीब एक दर्जन मंत्री और भाजपा-सपा के 100 से अधिक सांसद-विधायक अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए मैदान में जुटे हैं।
पिछले चुनाव में सपा ने छह और भाजपा ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा अपनी सीटों का आंकड़ा बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभाला है। गोरखपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, आगरा और गाजियाबाद समेत कई जिलों में भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में कार्यक्रम हुए। वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खुद मैदान में उतरने के बजाय सांसदों, विधायकों, जिलाध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों को चुनावी जिम्मेदारी सौंपी है। दोनों दलों के बीच कई सीटों पर कांटे की टक्कर मानी जा रही है।
बैलेट पेपर से चुनाव, ईवीएम के नैरेटिव की भी परीक्षा
एमएलसी चुनाव को विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल परखने का अहम मौका माना जा रहा है। इसकी तीन प्रमुख वजहें हैं। पहली, मतदान ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से होगा। ऐसे में भाजपा की जीत सपा के ईवीएम संबंधी आरोपों के खिलाफ राजनीतिक बहस को नया आधार दे सकती है, जबकि सपा की बढ़त उसके आरोपों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर सकती है।
दूसरी वजह इस चुनाव का मतदाता वर्ग है। शिक्षक और स्नातक मतदाताओं को पढ़ा-लिखा और जागरूक वर्ग माना जाता है। ऐसे मतदाताओं का समर्थन किसी दल के पक्ष में जाना उसके राजनीतिक संदेश को मजबूत कर सकता है। तीसरी वजह इन सीटों का भौगोलिक विस्तार है।
पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल तक फैली सीटों के दायरे में सभी 75 जिले शामिल हैं। ऐसे में नतीजों को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में राजनीतिक रुझान के संकेत के तौर पर भी देखा जाएगा। हालांकि, सीमित और विशिष्ट मतदाता वर्ग के कारण इसे पूरे प्रदेश के जनमत का सीधा पैमाना नहीं माना जा सकता।

पांच स्नातक और छह शिक्षक सीटों पर मुकाबला
11 सीटों में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन खंड की हैं। स्नातक सीटों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। शिक्षक निर्वाचन खंड में लखनऊ, आगरा, वाराणसी, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद सीटों पर चुनाव हो रहा है।
लखनऊ खंड स्नातक सीट पर पूर्व एमएलसी एवं सपा प्रत्याशी कांति सिंह तथा भाजपा के मौजूदा एमएलसी अवनीश कुमार सिंह के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा है।
इस सीट के तहत लखनऊ समेत नौ जिले आते हैं। लखनऊ खंड शिक्षक सीट पर भी इन्हीं नौ जिलों के मतदाता मतदान करेंगे। अब प्रचार के आखिरी घंटों में दलों की कोशिश अपने समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की है। 27 अक्टूबर को आने वाले नतीजे बताएंगे कि शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के बीच किस दल ने अपनी पकड़ मजबूत की है।






