UP में वोटर लिस्ट पर कांग्रेस का बड़ा सवाल : पीलीभीत में 13,150 वोटरों के नाम बदलने का आरोप
प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम से लेकर सुप्रिया श्रीनेत तक ने चुनाव आयोग को घेरा, 884 नाम हटाने और 26 नए नाम जोड़ने पर भी उठाए सवाल, नेता बोले- मामले को लेकर अदालत जाएगी पार्टी

लखनऊ, 21 अक्टूबर 2026:
यूपी में मतदाता सूची को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। यूपी कांग्रेस ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का दावा है कि जुलाई से सितंबर के बीच सामने आए आंकड़ों में 13,150 मतदाताओं के ईपीआईसी (EPIC) और सीरियल नंबर समान रहने के बावजूद उनके नाम बदलने के मामले सामने आए हैं। पार्टी ने 884 मतदाताओं के नाम हटाए जाने और 26 नए नाम जोड़े जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी नेताओं ने मतदाता सूची की निष्पक्षता, पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। यूपी प्रभारी एवं कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम ने पूछा कि यदि एक विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में इतनी विसंगतियों के आरोप सामने आ रहे हैं तो प्रदेश की अन्य विधानसभाओं में स्थिति क्या होगी? उन्होंने निर्वाचन आयोग से पूरे मामले पर जवाब देने और मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
वोटर आईडी होने पर भी सूची से नाम गायब होने पर चिंता
कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने मतदाता सूची से नाम गायब होने के मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि वोटर आईडी कार्ड होने के बावजूद मतदान के दिन मतदाता का नाम सूची में नहीं मिलना चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानूनी राय ली जाएगी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों के खिलाफ पार्टी का संगठन, कार्यकर्ता और पूरा कैडर अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनकी टीम की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
‘एक ही EPIC नंबर पर कैसे बदले नाम?’
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि समान ईपीआईसी नंबर पर मतदाता का नाम और पिता का नाम बदले जाने के कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि ऐसे बदलाव हुए हैं तो वे किसके निर्देश पर और किस प्रक्रिया के तहत किए गए। उन्होंने निर्वाचन आयोग से जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए मतदाताओं से आयोग की वेबसाइट पर अपना ईपीआईसी नंबर डालकर नाम और अन्य विवरण जांचने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘वन पर्सन, वन वोट’ का सिद्धांत सुरक्षित रहना चाहिए और ऐसे मामलों की अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी जांच होनी चाहिए।
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उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष—अनुसूचित जाति विभाग, AICC श्री @AdvRajendraPal जी ने प्रेस वार्ता में पीलीभीत सदर विधानसभा की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
उन्होंने बताया कि जुलाई से सितंबर के बीच सामने आए आँकड़ों के अनुसार, 13,150 मतदाताओं के EPIC एवं सीरियल नंबर समान रहने के बावजूद उनके नाम बदलने का आरोप है। इसके अतिरिक्त, 884 ऐसे मतदाताओं के नाम हटाए जाने और 26 ऐसे मतदाताओं के नाम जोड़े जाने का मामला भी उठाया गया, जिनके संबंध में सवाल खड़े हुए हैं।
श्री राजेंद्र पाल गौतम जी ने सवाल किया कि यदि एक विधानसभा में इस तरह की अनियमितताएँ सामने आ रही हैं, तो उत्तर प्रदेश की अन्य विधानसभाओं में मतदाता सूची की स्थिति क्या है? उन्होंने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इन गंभीर आरोपों पर जवाब देने की मांग की।
मताधिकार की रक्षा और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है।
— UP Congress (@INCUttarPradesh) October 21, 2026
अदालत का रुख करेगी कांग्रेस
कांग्रेस सांसद एवं प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना किसी एक राजनीतिक दल की नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने पीलीभीत के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की सराहना की जिन्होंने मतदाता सूची की जांच कर कथित विसंगतियों को सामने लाने का दावा किया। मसूद ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को लेकर अदालत का रुख भी करेगी। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से आरोपों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।






