गांधी और नेहरू के समय का वो नेता जो बटवारे के खिलाफ लड़ा, जानिए भारत के पहले शिक्षा मंत्री की कहानी…
मौलाना अबुल कलाम आजाद सऊदी अरब में जन्मे एक महान मुस्लिम नेता थे, जो बंटवारे के खिलाफ खड़े रहे और स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने। उन्होंने गांधी और नेहरू के साथ मिलकर देश की आज़ादी और शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
लखनऊ, 11 नवंबर 2025 :
आजादी के संग्राम के वो नेता जिन्होंने धर्म और राजनीति की सीमाओं को पार करते हुए देश के भविष्य के लिए संघर्ष किया, उनमें मौलाना अबुल कलाम आजाद का नाम सबसे ऊपर आता है। सऊदी अरब में जन्मे यह महान मुस्लिम नेता न केवल बंटवारे के खिलाफ थे, बल्कि उन्होंने नेहरू जैसे नेताओं से अपने विचारों में मतभेद होने के बावजूद देश की आज़ादी और एकता के लिए हमेशा मजबूत आवाज उठाई। आजाद केवल आजादी की लड़ाई के ही नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के निर्माण में भी अहम भूमिका निभाने वाले नेता थे, और वे हमारे देश के पहले शिक्षा मंत्री बने, जिन्होंने शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का मूलाधार माना।
सऊदी से भारत की आजादी तक का सफर
मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म 11 नवंबर 1888 को मक्का, सऊदी अरब में हुआ। उनका पूरा नाम अबुल कलाम मोहिउद्दीन अहमद था। उनके पिता 1857 की क्रांति के बाद भारत से सऊदी चले गए थे। करीब 30 साल बाद परिवार 1895 में भारत लौट आया और कलकत्ता में बस गया। बचपन में ही मां और पिता दोनों का देहांत हो गया। उन्हें कोई स्कूल या यूनिवर्सिटी की शिक्षा नहीं मिली, उनकी पढ़ाई-लिखाई घर पर ही हुई और उनके पिता ही उनके पहले शिक्षक थे।
महात्मा गांधी और कांग्रेस से जुड़ाव
18 जनवरी 1920 को अबुल कलाम आजाद पहली बार महात्मा गांधी से मिले। इसके बाद वे नेहरू और अन्य नेताओं से भी जुड़े। 1923 में उन्हें पहली बार कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया और 1940 में दोबारा अध्यक्ष बने। उस समय मोहम्मद अली जिन्ना अलग मुस्लिम राष्ट्र की तरफ बढ़ रहे थे। आजाद ने हमेशा बंटवारे के खिलाफ आवाज उठाई। जिन्ना उनके विचारों से इतने खफा थे कि उन्होंने उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा, लेकिन आजाद ने जवाब दिया कि हिंदू और मुसलमान आपस में भाई हैं और लड़ाई से समाधान नहीं मिलता।
नेहरू से मतभेद और बंटवारे का विरोध
1937 में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनाने के दौरान आजाद ने मुस्लिम लीग के दो सदस्यों को कैबिनेट में शामिल किया। नेहरू की अड़ियल नीति ने मुस्लिम लीग को ताकत दी और जिन्ना ने इसका फायदा उठाया। भारत के बंटवारे के समय आजाद ने इसे रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके।
स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री
आजादी के बाद अबुल कलाम आजाद उत्तर प्रदेश से लोकसभा पहुंचे और नेहरू की कैबिनेट में शिक्षा मंत्रालय संभाला। वे स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने और शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का आधार माना।
कैसा बीता जीवन का आखिरी समय?
मौलाना आजाद पारंपरिक भारतीय पोशाक पहनते थे, लेकिन जीवनशैली में आधुनिक थे। उन्हें शराब और सिगरेट पसंद थी। शाम के बाद ज्यादा काम करना पसंद नहीं करते थे। स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनके पैर कमजोर हो गए और 19 फरवरी 1958 को बाथरूम में गिरने के बाद 22 फरवरी 1958 को उनका निधन हो गया।






