लखनऊ, 18 दिसंबर 2025:
लखनऊ स्थित भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष समारोह का गुरुवार को भव्य आगाज हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन कर विश्वविद्यालय की सौ वर्षों की यात्रा, उसकी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्र निर्माण में कलाकारों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
छात्रों ने गाया कुलगीत, कुलपति ने किया स्वागत
मुख्यमंत्री ने कहा कि शताब्दी वर्ष का यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रबोध का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की आत्मा संस्कृति में बसती है और यदि संस्कृति को राष्ट्र से अलग कर दिया जाए, तो वह खंडहर बन जाता है। समारोह की शुरुआत कुलगीत से हुई, जिसे विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किया। कुलपति प्रो. मानवी सिंह ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया।

‘लीगेसी ऑफ एक्सीलेंस’ का विमोचन, पूर्व छात्र सम्मानित
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय की कॉफी टेबल बुक ‘लीगेसी ऑफ एक्सीलेंस’ का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से विश्वविद्यालय के गौरवशाली इतिहास और दुर्लभ छायाचित्रों को नई पीढ़ी देख सकेगी। वहीं विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इनमें कथक नृत्यांगना डॉ. पूर्णिमा पांडेय, पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी, प्रसिद्ध गायिका दिलराज कौर और संगीत संयोजक केवल कुमार शामिल रहे।
पुराना भवन म्यूजियम बनेगा, नए परिसर में बसेगा भातखंडे
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के लिए लखनऊ में छह एकड़ भूमि उपलब्ध कराई गई है, जहां अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नया परिसर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नए परिसर में ओपन थियेटर, कम से कम दो ऑडिटोरियम और समृद्ध पुस्तकालय होगा। पुराने भवन को म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां सौ वर्षों में विश्वविद्यालय से जुड़े शिक्षकों, विद्यार्थियों और कलाकारों से जुड़ा ऐतिहासिक रिकॉर्ड संजोया जाएगा।

कला और संस्कृति का मूल स्वर ‘ओंकार’
शताब्दी वर्ष के दौरान अलग-अलग दिनों में पूर्व छात्रों की सौ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी, ताकि समाज को उनकी कला और योगदान से परिचित कराया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि कलाकारों को सम्मान और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए। इसके लिए सरकार कलाकारों के स्वास्थ्य, प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी समग्र नीति बनाएगी। उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति का मूल स्वर ‘ओंकार’ है और पूरा जगत नाद के अधीन है। पंडित विष्णु सहाय भातखंडे ने कठिन दौर में संगीत और संस्कृति को आत्मसम्मान देने का कार्य किया, जिसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आज की पीढ़ी की है। राष्ट्र की आत्मा संस्कृति में होती है, जैसे कोई मनुष्य है, आत्मा जब उससे अपना संबंध तोड़ देती है तो शरीर निस्तेज हो जाता है, मृत हो जाता है, ऐसे ही राष्ट्र के जीवन में भी होता है। अगर उसकी संस्कृति को उससे अलग कर दिया जाए तो राष्ट्र निस्तेज हो जाता है, खंडहर हो जाता है, अपनी पहचान को खो देता है।

सीएम ने किया महाकुंभ का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1940 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने अपने पत्रों में इस संस्थान को विश्वविद्यालय के रूप में संबोधित किया था। लंबे समय तक उपेक्षा के बाद वर्ष 2022 में प्रदेश सरकार ने उनकी परिकल्पना को साकार करते हुए इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिया। यह उत्तर प्रदेश का पहला संस्कृति विश्वविद्यालय है। मुख्यमंत्री ने महाकुंभ का उल्लेख करते हुए कहा कि संस्कृति के मंच पर आज का युवा भी पूरी ताकत से जुड़ रहा है और यही भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है।

सोनल मान सिंह रहीं विशिष्ट अतिथि
समारोह की विशिष्ट अतिथि प्रख्यात नृत्यांगना पद्म विभूषण डॉ. सोनल मानसिंह रहीं। कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल, पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, विधान परिषद सदस्य रामचंद्र प्रधान और अविनाश सिंह, विधायक नीरज बोरा, प्रमुख सचिव अमृत अभिजात सहित कई खास लोग उपस्थित रहे।






