लखनऊ, 8 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश सरकार ने अंतरराज्यीय अवैध रेत खनन और बिक्री पर रोक लगाने के लिए बडा कदम उठाया है। इसके तहत यूपी भूतत्व और खनिकर्म विभाग ने प्रदेश से सटे मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार से सक्रिय सहयोग मांगा है। इन राज्यों के खनन विभाग और प्रशासन के साथ मिलकर संयुक्त निगरानी और प्रवर्तन तंत्र तैयार किया जा रहा है, ताकि अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश में आने वाले रेत लदे वाहनों के लिए वैध ट्रांजिट पास के साथ अंतरराज्यीय परिवहन प्रपत्र यानी आईएसटीपी अनिवार्य होगा। सीमावर्ती जिलों में ट्रांजिट पास जारी करते समय ही अंतरराज्यीय परिवहन शुल्क जमा कराने पर जोर दिया गया है। इसके लिए इंटीग्रेटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिये निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।
मुख्य सचिव की बैठक में अधिकारियों ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म से न केवल अवैध परिवहन रोका जाएगा, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी और राजस्व संग्रह में सुधार होगा। यह सिस्टम रियल टाइम डाटा के आधार पर काम करेगा, जिससे वाहनों की आवाजाही और रेत की बिक्री पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि सीमावर्ती राज्यों में स्थित खनन पट्टों, खनिज भंडारण स्थलों और क्रशरों पर वाहन लोडिंग नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। ओवरलोडिंग की जानकारी साझा की जाएगी और सीमावर्ती राज्यों के चेकगेट और चेकपोस्ट की सूची यूपी प्रशासन को उपलब्ध कराई जाएगी। यूपी की ओर आने वाले सभी वाहनों का विवरण नियमित रूप से साझा किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि सीमावर्ती जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस, परिवहन और खनन विभाग के अधिकारियों के साथ मासिक समन्वय बैठकें की जाएंगी। इन बैठकों में पड़ोसी राज्यों के अधिकारी और टास्क फोर्स सदस्य शामिल होंगे और संयुक्त प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी। पहले ड्रोन सर्वे और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी तकनीक अपनाई जा चुकी है, लेकिन अब पड़ोसी राज्यों के सहयोग से यह व्यवस्था और मजबूत होगी। यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप गंगा बेसिन में अवैध रेत खनन रोकने, पर्यावरण संरक्षण और राजस्व वृद्धि में अहम भूमिका निभाएगी।






