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बागपत में संवर रहा बेटियों का भविष्य…‘नव देवियों की शक्ति’ से साकार हो रहा योगी का विजन

महिला सशक्तिकरण की दिशा में नई क्रांति लाया 'बागपत मॉडल', प्रशासन व खाप पंचायतों की साझेदारी से बेटियों के सम्मान और सुरक्षा के लिए 9 अभिनव योजनाएं लागू हुईं

लखनऊ, 12 जनवरी 2026:

बागपत में ‘नव देवियों की शक्ति’ अभियान के तहत 9 नई योजनाओं की शुरुआत की गई है, जो महिला सशक्तिकरण को एक नई दिशा दे रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार ये योजनाएं बेटियों के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर आधारित हैं। खास बात यह है कि इन योजनाओं को प्रशासन और खाप पंचायतों की साझेदारी से लागू किया जा रहा है, जिससे यह पहल प्रदेश के लिए एक आदर्श बन रही है। इसका उद्देश्य बेटियों को न केवल सुरक्षा, बल्कि उन्हें समान अवसर और सामाजिक स्वीकृति भी प्रदान करना है।

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बागपत में सोच का बदलाव: बेटियों को मिली पहचान

एक घर में हंसती-खिलखिलाती बेटी अब बोझ नहीं, बल्कि शान बन चुकी है। घरों के बाहर बेटियों के नाम की नेम प्लेट लगाई जा रही है, जो यह संदेश देती है कि बेटी बोझ नहीं, परिवार का गौरव है। यह बदलाव किसी चमत्कार से नहीं, बल्कि बागपत के ‘नव देवियों के नौ मंत्रों’ से आया है, जिसे अब पूरे उत्तर प्रदेश में अपनाया जा रहा है।

‘नव देवियों की शक्ति’ की प्रमुख पहलें

निरा मुहिम: प्लास्टिक वेस्ट कम करने के लिए बागपत में महिलाओं और बालिकाओं को रियूजेबल सेनेट्री पैड दिए जा रहे हैं, जो पर्यावरण के लिए भी लाभकारी हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

बेटी का नाम घर की शान: इस अभियान के तहत बेटियों के नाम की नेम प्लेट घरों के बाहर लगाई जा रही है, जिससे पितृसत्तात्मक सोच में बदलाव आए और यह संदेश जाए कि बेटी घर की पहचान और गर्व है।

मेरी बेटी, मेरी कुलदीपक: इस योजना के तहत उन परिवारों को सम्मानित किया जा रहा है जिनकी एक या दो बेटियां हैं। उपहार देकर यह संदेश दिया जा रहा है कि अगर बेटियों को अच्छे अवसर मिलें, तो वे समाज में रोशनी फैला सकती हैं।

कन्या जन्मोत्सव: नवजात बालिकाओं के जन्म पर उन्हें जन्म प्रमाण पत्र, बेबी किट और सरकारी योजनाओं में तुरंत नामांकन दिया जा रहा है, जिससे परिवारों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।

बुनकर महिलाएं और आत्मनिर्भरता: बागपत में बुनकर महिलाओं को रोजगार देने के लिए योजनाओं का प्रचार किया जा रहा है, जिससे उन्हें न केवल आर्थिक स्वतंत्रता मिल रही है, बल्कि पारंपरिक हुनर को भी बाजार मिल रहा है।

सांस अभियान: नवजात शिशुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे नवजात मृत्यु दर में कमी आई है।

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा: महिलाओं के कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं। इसके अलावा, स्तनपान कक्ष की शुरुआत की गई है, जो कामकाजी महिलाओं को गरिमा प्रदान करता है।

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किशोरी का पिटारा: इस पहल के तहत किशोरियों को उन संवेदनशील मुद्दों पर जागरूक किया जा रहा है जिनके बारे में वे खुलकर सवाल नहीं कर पातीं। यह सवाल एक बॉक्स में डाले जाते हैं, जिनके जवाब काउंसलर द्वारा दिए जाते हैं।

हर बेटी का सम्मान: मिशन शक्ति 5.0 के तहत खाप पंचायतों को दहेज प्रथा, ऑनर किलिंग और भ्रूण हत्या के खिलाफ एकजुट किया गया है। इसके अंतर्गत कुप्रथाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, और अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों को बंद किया गया है।

बागपत मॉडल का उद्देश्य

बागपत का यह मॉडल केवल बेटियों को संरक्षण देने का नहीं है, बल्कि उन्हें समान अवसर, समाज में स्वीकृति और आत्मनिर्भरता दिलाने का है। ‘नव देवियों की शक्ति’ के नौ मंत्र स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े हुए हैं। प्रशासन और समाज की साझेदारी से यह पहल आगे बढ़ रही है, और खाप पंचायतों का इसमें सक्रिय भागीदारी इसे एक मजबूत सामाजिक आंदोलन बना रही है।

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प्रशासन व समुदाय का मिलकर काम करना जरूरी

जिलाधिकारी बागपत अस्मिता लाल ने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि हर बेटी को सम्मान, सुरक्षा, पहचान और अवसर मिले। बागपत मॉडल प्रदेश की अन्य जिलों के लिए एक आदर्श बनेगा। बागपत की यह पहल बेटियों के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकती है, और समाज में बदलाव लाने के लिए प्रशासन और समुदाय का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है।

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