लखनऊ/नई दिल्ली, 13 जनवरी 2026:
माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे और यूपी के मऊ से विधायक अब्बास अंसारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने यूपी गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में उन्हें पहले दी गई अंतरिम जमानत को नियमित कर दिया। इस फैसले से अब्बास अंसारी की जेल से रिहाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
यह मामला चित्रकूट जिले के कर्वी थाना क्षेत्र का है। वहां 31 अगस्त 2024 को अब्बास अंसारी और अन्य के खिलाफ जबरन वसूली और मारपीट के आरोपों में गिरोहबंद अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। इससे पहले 7 मार्च 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी थी। अब उसी राहत को बरकरार रखते हुए अदालत ने इसे नियमित जमानत में बदल दिया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने अब्बास अंसारी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता निजाम पाशा की दलीलों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि गिरोहबंद अधिनियम के इस मामले को छोड़कर अब्बास अंसारी को अन्य सभी आपराधिक मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है।
गौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर 2024 को इस मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी लगाई थीं, जिनमें बिना जांच अधिकारी की अनुमति के लखनऊ न छोड़ने की शर्त शामिल थी। बाद में अदालत ने कुछ शर्तों में आंशिक ढील भी दी।
अब्बास अंसारी को 4 नवंबर 2022 को अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया था। 6 सितंबर 2024 को उन्हें गिरोहबंद अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया। इस मामले में नवनीत सचान, नियाज अंसारी, फराज खान और शाहबाज आलम खान सह आरोपी हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले को अब्बास अंसारी के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।






