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17 फीसदी गिरावट के बाद फिर एक्शन मोड में यूपी सरकार, शुरू होगा सघन टीबी अभियान

यूपी सरकार फरवरी से 100 दिवसीय सघन टीबी रोगी खोज अभियान शुरू कर रही है, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक मरीजों की पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित करना है। जनभागीदारी और ठोस रणनीति के चलते पहले ही टीबी मरीजों और मौतों में 17 प्रतिशत की कमी दर्ज की जा चुकी है

लखनऊ, 15 जनवरी 2026:

उत्तर प्रदेश सरकार एक बार फिर प्रदेश को तपेदिक यानी टीबी से मुक्त करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। फरवरी से पूरे उत्तर प्रदेश में 100 दिवसीय विशेष सघन टीबी रोगी खोज अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान का मकसद अधिक से अधिक टीबी मरीजों की पहचान कर समय पर उनका इलाज शुरू करना है। स्वास्थ्य महानिदेशक ने सभी अपर निदेशकों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अभियान को लेकर विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।

जनभागीदारी से मिले बेहतर नतीजे

स्वास्थ्य सचिव डॉ पिंकी जोवल के मुताबिक सघन टीबी खोज अभियान 7 दिसंबर 2024 से लगातार चल रहा है, जिसका सकारात्मक असर देखने को मिला है। वर्ष 2015 की तुलना में प्रति एक लाख आबादी पर टीबी मरीजों की संख्या में 17 प्रतिशत की कमी आई है। साथ ही टीबी से होने वाली मौतों में भी 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इन्हीं नतीजों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर फरवरी में एक बार फिर विशेष अभियान शुरू करने का फैसला लिया गया है।

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नेताओं और समाज की होगी सीधी भागीदारी

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ आर पी सिंह सुमन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। सभी सीएमओ को कहा गया है कि दो महीने के भीतर सांसदों के साथ जनपद स्तर पर समीक्षा बैठकें कराएं और उन्हें निःक्षय शिविरों व जनजागरूकता कार्यक्रमों से जोड़ा जाए। इसके अलावा विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, ग्राम प्रधानों और पार्षदों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा। माई भारत वालंटियर्स और पंजीकृत निःक्षय मित्रों की मदद से जागरूकता को और मजबूत किया जाएगा।

स्कूल, जेल और बस्तियों में चलेगी जांच

अभियान के तहत सभी कारागारों और मलिन बस्तियों में टीबी स्क्रीनिंग कराई जाएगी। प्राथमिक विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक निबंध और पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों और युवाओं को टीबी के प्रति जागरूक किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे टीबी के लक्षण वाले लोगों को जांच के लिए भेज सकें। इसके साथ ही परिवहन विभाग से जुड़े सभी चालकों और कंडक्टरों की जांच तथा कारखानों में काम करने वाले मजदूरों की भी शिविर लगाकर स्क्रीनिंग की जाएगी।

जांच और इलाज की साफ रणनीति

अभियान की रणनीति के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और उनसे नीचे की इकाइयों से पांच प्रतिशत और जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों से 10 प्रतिशत मरीजों को सामान्य ओपीडी से टीबी जांच के लिए रेफर किया जाएगा। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से सैंपल ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। बुजुर्गों और गंभीर मरीजों की जांच को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही गैर सरकारी संगठनों, कॉरपोरेट संस्थानों और विभिन्न विभागों को निःक्षय मित्र के रूप में आगे आने के लिए प्रेरित किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी मरीजों को रोजगार से जोड़ने के लिए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर प्रशिक्षण देने को लेकर कौशल विकास विभाग को पत्र भी भेजा है।

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