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छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति पर सख्ती : योगी सरकार ने बदली नियमावली… जानें किसे मिलेंगे लाभ

निजी शिक्षण संस्थानों में पारदर्शी प्रवेश पर ही मिलेगा छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का फायदा, मैनेजमेंट कोटा और स्पॉट एडमिशन के दुरुपयोग पर लगेगी सख्त रोक

लखनऊ, 11 जनवरी 2026:

यूपी में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ केवल वास्तविक और पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से योगी सरकार ने अहम और सख्त निर्णय लिया है। दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना की नियमावली-2023 में व्यापक संशोधन करते हुए निजी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। यह संशोधन अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और सामान्य वर्ग के सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से प्रभावी होंगे।

समाज कल्याण विभाग की इस योजना के तहत अब व्यावसायिक और तकनीकी पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति अथवा शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ तभी मिलेगा जब उनका प्रवेश निर्धारित, खुली और सत्यापन योग्य प्रक्रिया से हुआ हो। सरकार का मानना है कि अब तक मैनेजमेंट कोटा, स्पॉट एडमिशन और अन्य गैरपारदर्शी तरीकों से प्रवेश देकर योजना का दुरुपयोग किया जा रहा था। इससे वास्तविक पात्र छात्र लाभ से वंचित रह जाते थे।

समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह के अनुसार संशोधित नियमों का मुख्य उद्देश्य निजी शिक्षण संस्थानों की प्रवेश प्रक्रिया को तकनीकी रूप से स्पष्ट और जवाबदेह बनाना है। नए प्रावधानों के तहत संस्थानों को प्रवेश से पहले सार्वजनिक रूप से विज्ञापन जारी करना होगा, आवेदन आमंत्रित करने होंगे, मेरिट या रैंक सूची तैयार कर उसका प्रकाशन करना अनिवार्य होगा। इसके बाद चयन सूची जारी कर ही विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जा सकेगा।

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नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि छात्रों से केवल वही शुल्क लिया जाएगा जिसे सक्षम प्राधिकारी या शुल्क नियामक समिति द्वारा स्वीकृति प्राप्त हो। अनुमोदित सीमा से अधिक फीस वसूलने की स्थिति में न केवल संस्था पर कार्रवाई की जाएगी बल्कि संबंधित छात्रों को भी छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा।

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संशोधित नियमावली के तहत सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को भी शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा लेकिन इसके लिए भी पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया और निर्धारित शुल्क का पालन अनिवार्य होगा। मैनेजमेंट कोटा, स्पॉट एडमिशन या किसी भी प्रकार की अपारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से प्रवेश लेने वाले छात्र इस योजना से बाहर रहेंगे। सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, अनुशासन और सामाजिक न्याय को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे छात्रवृत्ति योजना का वास्तविक लाभ सही हकदारों तक पहुंच सकेगा।

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