UP में जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटल कायाकल्प, लागू हुई रियल टाइम खतौनी व्यवस्था
राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण को मिली रफ्तार, 99.86 प्रतिशत रियल टाइम खतौनी का काम पूरा, 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज, भू-नक्शों का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण

लखनऊ, 19 अक्टूबर 2026:
यूपी में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को पारदर्शी, सुलभ और अद्यतन बनाने के लिए राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव किए गए हैं। वर्ष 2017 से पहले जहां खतौनी का निर्माण छह वर्ष के रोस्टर के आधार पर होता था, वहीं अब प्रदेश में रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक इस व्यवस्था के तहत 99.86 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ऑनलाइन वरासत, डिजिटल भू-नक्शे, अंश निर्धारण और ई-खसरा पड़ताल जैसे कार्यों ने भी भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को नई गति दी है।
पहले राजस्व विभाग की कई सेवाएं ऑफलाइन प्रक्रियाओं पर निर्भर थीं। वरासत दर्ज कराने से लेकर खसरा तैयार करने और भूमि अभिलेखों में संशोधन तक लोगों को पारंपरिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था। भू-नक्शों की ऑनलाइन उपलब्धता सीमित होने के कारण जमीन के रिकॉर्ड और नक्शों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में भी परेशानी होती थी। अब इन सेवाओं को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
रियल टाइम खतौनी से रिकॉर्ड को मजबूती
राजस्व विभाग ने खतौनी को अधिक प्रामाणिक और उपयोगी बनाने के लिए क्यूआर कोड तथा डिजिटल हस्ताक्षर युक्त खतौनी की व्यवस्था भी विकसित की है। इससे दस्तावेजों का सत्यापन आसान बनाने और भूमि रिकॉर्ड की प्रामाणिकता जांचने में मदद मिल सकती है। छह वर्ष के रोस्टर वाली पुरानी व्यवस्था के मुकाबले रियल टाइम खतौनी का उद्देश्य अभिलेखों को अधिक अद्यतन रखना है।
65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन
भूमि स्वामी की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार.अब तक 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। इससे नागरिकों को आवेदन प्रक्रिया में डिजिटल सुविधा मिली है और राजस्व सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने का प्रयास किया गया है।
नक्शों का शत-प्रतिशत डिजिटलीकरण
भूमि रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के मामले में भी विभाग ने प्रगति दर्ज की है। उपलब्ध भू-नक्शों और शजरों का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है, जबकि 98 प्रतिशत भू-नक्शों को खतौनी से लिंक किया जा चुका है। इसके अलावा 85 प्रतिशत से अधिक गाटों में अंश निर्धारण का काम पूरा किया गया है।
वहीं, वर्ष 2021 से ई-खसरा पड़ताल ऐप के माध्यम से डिजिटल खसरा तैयार किया जा रहा है। इस व्यवस्था से खेतों से संबंधित विवरण डिजिटल रूप में दर्ज करने का आधार तैयार हुआ है। इन पहलों का उद्देश्य भूमि अभिलेखों को अधिक व्यवस्थित बनाना, जानकारी की उपलब्धता बढ़ाना और राजस्व सेवाओं को तकनीक आधारित बनाना है।






