लखनऊ, 18 जनवरी 2026:
उत्तर प्रदेश में खेती को ज्यादा लाभकारी और जल-संरक्षण को मजबूत करने के लिए माइक्रो इरिगेशन पर जोर दिया जा रहा है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग केंद्र सरकार की एमसीएडीडब्ल्यूएम योजना के तहत गोरखपुर और संतकबीर नगर में पायलट परियोजनाएं तैयार कर रहा है।
इन परियोजनाओं के जरिए राप्ती और कुवानो नदी क्षेत्र में आधुनिक प्रेशराइज्ड पाइप्ड इरिगेशन नेटवर्क लगाया जाएगा, जिससे पानी सीधे खेतों तक पहुंचेगा और बेकार बहने से बचेगा। इससे जल उपयोग की दक्षता करीब 75 प्रतिशत तक बढ़ने की उम्मीद है।
गोरखपुर और संतकबीर नगर में छह परियोजनाएं
दोनों जिलों में कुल छह पायलट परियोजनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से चार की डीपीआर तैयार हो चुकी है, जबकि दो के कमांड एरिया को लेकर प्रक्रिया चल रही है। इन परियोजनाओं का कुल खेती योग्य क्षेत्र करीब 2149 हेक्टेयर है। गोरखपुर के बांसगांव, मलांव व मझगवां, राजधनी, बरगदवां, जंगल गौरी-1 और संतकबीर नगर के प्रजापतिपुर क्लस्टर को इसमें शामिल किया गया है।
बांसगांव और जंगल गौरी-1 क्लस्टर को मंजूरी मिलते ही फरवरी 2026 के अंत तक सभी इलाकों में सिंचाई व्यवस्था शुरू होने की संभावना है। इससे हजारों किसानों को सीधा फायदा मिलेगा और रबी व खरीफ दोनों फसलों की पैदावार बढ़ेगी।
पीपीआईएन तकनीक से कम पानी, ज्यादा फसल
पीपीआईएन तकनीक के जरिए पानी को सीधे जलस्रोत से खेतों तक पहुंचाया जाएगा। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी और जरूरत के मुताबिक सिंचाई हो सकेगी। किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसे माइक्रो इरिगेशन उपकरणों के लिए भी मदद दी जाएगी। हर क्लस्टर में बनी वाटर यूजर सोसाइटी सिंचाई नेटवर्क की देखरेख करेगी।
प्रोजेक्ट की सफलता पर पूरे प्रदेश में होगा विस्तार
इन पायलट परियोजनाओं की सफलता के बाद माइक्रो इरिगेशन को दूसरे जिलों में भी लागू किया जाएगा। इससे ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ की सोच को मजबूती मिलेगी और किसानों को कम खर्च में बेहतर पैदावार का रास्ता खुलेगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से खेती ज्यादा टिकाऊ बनेगी, पानी की बचत होगी और आने वाले वक्त में किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा।





