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बैन के बावजूद बिक रहा ‘उड़ता ब्लेड’! देशभर में है कड़ा कानून… फिर भी चाइनीज मांझे से हुईं इतनी मौतें

लखनऊ में चाइनीज मांझे से युवक की मौत के बाद सीएम योगी ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे अब हत्या की श्रेणी में रखने के निर्देश दिए हैं। बैन और कड़े कानूनों के बावजूद यूपी में चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री जारी है

लखनऊ, 5 फरवरी 2025:

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चाइनीज मांझे से एक युवक की दर्दनाक मौत के बाद सरकार पूरी तरह सख्त हो गई है। दरअसल बुधवार दोपहर हैदरगंज चौराहे से तालकटोरा मिल एरिया को जाने वाले फ्लाईओवर पर स्कूटी सवार एक युवक की गर्दन पतंग के चाइनीज मांझे से कट गई। मृतक की पहचान मो. शोएब (35) के रूप में हुई है, जो एक दवा कंपनी में मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर) के पद पर कार्यरत थे। हादसा इतना अचानक था कि उनको संभलने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही मौत हो गई।

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बैन के बावजूद कैसे बिक रहा जानलेवा मांझा?

उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे के प्रयोग और बिक्री पर पहले से ही पूर्ण प्रतिबंध है, इसके बावजूद इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। शोएब की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने अफसरों से सख्त लहजे में सवाल किया कि बैन के बावजूद बाजार में चाइनीज मांझा आखिर कैसे बिक रहा है और तुरंत इस पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए। सीएम योगी ने साफ कहा कि अब चाइनीज मांझे से होने वाली मौत को ‘हत्या’ माना जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस प्रमुखों को जिलेवार छापेमारी कर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए।

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पुराना लखनऊ बना अवैध मांझे का गढ़

जानकारों के मुताबिक, लखनऊ के सआदतगंज, अकबरीगेट, वजीरबाग, मोहिनीपुरवा और हुसैनगंज जैसे इलाकों में चोरी-छिपे चाइनीज मांझे की बिक्री लगातार जारी है। इन इलाकों में सट्टा लगाकर पतंगबाजी भी होती है। इसी वर्ष जनवरी में इस अवैध कारोबार को लेकर सीएम पोर्टल पर शिकायत भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन इसके बावजूद बिक्री नहीं रुकी।

लखनऊ में चाइनीज मांझे से हुए बड़े हादसे

24 मार्च 2025: कृष्णानगर इलाके में बाइक सवार अमन की गर्दन कटने से मौत।

03 सितंबर 2025: सर्व समाज उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष असीम मार्शल का चेहरा बुरी तरह कट गया।

22 जून 2022: कैंट इलाके में युवक का हाथ और चेहरा कट गया।

14 नवंबर 2020: बाराबंकी निवासी लवकुश हुसड़िया फ्लाईओवर के पास घायल।

18 अगस्त 2019: गोसाईगंज में राम कुमार की गर्दन कट गई।

12 मई 2018: गोमतीनगर में विजय लक्ष्मी गुप्ता घायल।

28 नवंबर 2017: बाजारखाला में इकराम की गर्दन में गंभीर चोट।

एक साल में 8 मौतें, कई जिंदगियां बाल-बाल बचीं

प्रदेश में बीते एक साल के भीतर चाइनीज मांझे से 8 लोगों की जान जा चुकी है।

लखनऊ (11 दिसंबर 2025): बाइक से घर लौट रहे युवक की गर्दन कट गई, डॉक्टरों ने सात टांके लगाकर जान बचाई।

जौनपुर (10 दिसंबर 2025): कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर संदीप तिवारी की गला कटने से मौत।

शाहजहांपुर (11 जनवरी 2025): कांस्टेबल शाहरुख हसन की इलाज के दौरान मौत।

शाहजहांपुर (23 अक्टूबर 2025): रोजा के हांडा पुल के पास रवि शर्मा की मौत।

अलीगढ़ (30 सितंबर 2025): जमालपुर पुल पर सलमान की गर्दन कटने से मौत।

गोरखपुर (29 जुलाई 2025): अमित गुप्ता गंभीर रूप से घायल, लंबा ऑपरेशन, जान बची।

यूपी में पहले से बैन, फिर भी बेखौफ कारोबारी और क्रेता

उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है फिर भी कारोबारी इसे बेचते हैं और क्रेता बेधड़क खरीदते हैं। भारत में सामान्य तौर पर सूती धागे से पतंग की डोर बनाई जाती है, जबकि चाइनीज मांझा नायलॉन में मेटलिक पाउडर, कांच और लोहे के चूरे को मिलाकर तैयार किया जाता है। यही वजह है कि यह मांझा न टूटता है और बेहद धारदार होता है, जो इंसानी गर्दन को आसानी से काट सकता है।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक सख्त रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 नवंबर 2015 को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रदेश के सभी जिलों में चाइनीज मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर देशभर में बैन लगा दिया। कई अन्य हाईकोर्ट और नगर प्रशासन भी इसे गैरकानूनी घोषित कर चुके हैं।

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कानून क्या कहता है?

भारत में चाइनीज मांझा बेचना या इस्तेमाल करना अपराध है। कई राज्यों में इसके लिए 5000 रुपये तक का जुर्माना और 3 साल तक की जेल का प्रावधान है। इसके बावजूद काला बाजार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसकी बिक्री जारी है। वहीं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 2017 से चाइनीज मांझे की खरीद, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूरी तरह रोक लगा रखी है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की सजा और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। अगर किसी की मौत होती है तो सजा और भी गंभीर हो जाती है।

चाइनीज और सादे मांझे में क्या है फर्क?

नायलॉन के धागे पर कांच की कोटिंग से बना चाइनीज मांझा एक झटके में जान ले सकता है। सामान्य मांझा हाथ से टूट जाता है, जबकि चाइनीज मांझे को काटने के लिए कैंची की जरूरत पड़ती है। यही वजह है कि इसे ‘उड़ता हुआ ब्लेड’ भी कहा जाता है।

कैसे बनता है चाइनीज मांझा?

चाइनीज मांझा साधारण धागे से नहीं बनता। इसे नायलॉन और मैटेलिक पाउडर से तैयार किया जाता है, जो प्लास्टिक जैसा दिखता है और बेहद लचीला होता है। खींचने पर यह टूटने की बजाय और फैल जाता है। इसके बाद इसमें कांच या लोहे का चूरा मिलाकर धार लगाई जाती है, जिससे यह और ज्यादा घातक हो जाता है। इतना खतरनाक होने के बावजूद हादसे के बाद कुछ समय के लिए दुकानदार इसकी बिक्री रोक देते हैं, लेकिन मामला शांत होते ही अवैध कारोबार फिर शुरू हो जाता है। यही वजह है कि हर साल यह ‘उड़ता हुआ ब्लेड’ कई जिंदगियां निगल रहा है।

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