लखनऊ, 11 फरवरी 2026:
यूपी बजट 2026 में हथकरघा, वस्त्रोद्योग और खादी ग्रामोद्योग सेक्टर को बड़ी राहत दी गई है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इन क्षेत्रों के लिए हजारों करोड़ रुपये के प्रावधान का ऐलान किया। सरकार का फोकस इस बात पर है कि पारंपरिक उद्योगों को मजबूत कर रोजगार के मौके बढ़ाए जाएं।
हथकरघा और टेक्सटाइल के लिए 5,041 करोड़
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग की योजनाओं के लिए करीब 5,041 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि पिछले साल की तुलना में पांच गुना से ज्यादा बताई जा रही है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में वस्त्रोद्योग क्षेत्र में 30,000 नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है।
प्रदेश को गारमेंटिंग हब बनाने के लिए पीएम मित्र पार्क योजना के तहत विश्वस्तरीय मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जा रहा है। इससे बड़े निवेश और रोजगार की उम्मीद है।

पावरलूम बुनकरों को बड़ी राहत
हथकरघा के साथ पावरलूम बुनकरों को भी राहत दी गई है। अटल बिहारी बाजपेई पावरलूम बुनकर विद्युत फ्लैट रेट योजना के लिए 4,423 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका मकसद बुनकरों को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध कराना है। उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं गारमेंटिंग पॉलिसी 2022 के लिए 150 करोड़ रुपये रखे गए हैं ताकि नए निवेश और इकाइयों को बढ़ावा मिल सके।
खादी और ग्रामोद्योग को भी सहारा
खादी एवं ग्रामोद्योग सेक्टर में भी रोजगार बढ़ाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत वर्ष 2026-27 में 800 नई इकाइयां स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 40 करोड़ रुपये के बैंक ऋण की व्यवस्था की जाएगी और करीब 16,000 लोगों को रोजगार देने की योजना है। पंडित दीनदयाल ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत ग्रामीण इकाइयों को बैंक ऋण पर ब्याज अनुदान के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
खजनी कम्बल केंद्र व माटीकला पर फोकस
गोरखपुर के खजनी स्थित कम्बल उत्पादन केंद्र के आधुनिकीकरण के लिए 7 करोड़ 50 लाख रुपये की नई योजना लाई गई है। वहीं उत्तर प्रदेश माटीकला बोर्ड के जरिए पारंपरिक कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए माटीकला समन्वित विकास कार्यक्रम पर 13 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
पारंपरिक उद्योगों से रोजगार की उम्मीद
बजट को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार पारंपरिक उद्योगों को नई रफ्तार देना चाहती है। हथकरघा, पावरलूम, खादी और माटीकला जैसे क्षेत्रों को मजबूत कर ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में रोजगार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।






