कानपुर, 12 फरवरी 2026:
यूपी के कानपुर के हाई प्रोफाइल लैंबॉर्गिनी एक्सीडेंट केस में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। चार दिन बाद पुलिस के हाथ लगे आरोपी शिवम मिश्रा को अदालत से कुछ ही घंटों में राहत मिल गई। विशेष सुनवाई के दौरान कोर्ट ने न केवल शिवम की जमानत मंजूर कर ली बल्कि पुलिस की 14 दिन की रिमांड अर्जी को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब सभी धाराएं जमानती हैं तो रिमांड की जरूरत क्यों है? इस सवाल पर जांच अधिकारी कोई ठोस कारण नहीं बता सके। नतीजतन 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर शिवम को रिहा कर दिया गया।
पुलिस ने शिवम को गुरुवार सुबह करीब 8 बजे उसके घर के सामने से गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और खुद को छिपाए हुए था। यहां तक कि सूचना मिली कि वह एंबुलेंस से भागने की कोशिश कर रहा है। गिरफ्तारी के बाद मेडिकल जांच कराकर पुलिस उसे स्थानीय अदालत में पेश करने पहुंची। कोर्ट परिसर के बाहर मीडियाकर्मियों द्वारा वीडियो बनाए जाने पर शिवम नाराज भी नजर आया।

यह हादसा गत रविवार को हुआ था। तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी कार ने कई लोगों को टक्कर मार दी थी। आरोप है कि कार अरबपति तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा चला रहा था। हादसे के तुरंत बाद शिवम को घटनास्थल से हटवाया गया और मीडिया के सामने कारोबारी ने दावा किया कि उनका बेटा कार नहीं चला रहा था। जब मामला तूल पकड़ने लगा और शासन ने कार्रवाई के निर्देश दिए तो कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने साफ कहा कि गाड़ी शिवम ही चला रहा था और जांच में इसकी पुष्टि हुई है। इस बयान पर केके मिश्रा ने नाराजगी जताई और कमिश्नर पर झूठ बोलने का आरोप लगाया।
दूसरी तरफ बुधवार को मोहन नाम का एक व्यक्ति कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा और खुद को हादसे के वक्त कार चलाने वाला बताया। हालांकि कोर्ट ने उसकी अर्जी खारिज कर दी और उसे मामले में आरोपी मानने से इनकार कर दिया। फिलहाल शिवम जमानत देने के साथ अदालत ने शर्त रखी है कि उसे जांच में पूरा सहयोग करना होगा और पुलिस की पूछताछ के लिए उपलब्ध रहना पड़ेगा।






