Lucknow City

चारबाग से बसंतकुंज तक मेट्रो दौड़ाने की कवायद को रफ्तार, 150 करोड़ से बनेगा अत्याधुनिक मेट्रो डिपो

डिपो में होगी ट्रेनों की पार्किंग, मरम्मत और नियमित जांच, ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के 12 किलोमीटर लंबे रूट में ठाकुरगंज से बसंतकुंज तक 5 एलिवेटेड स्टेशन और शहर के व्यस्त इलाकों में 7 अंडरग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित

लखनऊ, 13 फरवरी 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की राह अब साफ हो गई है। चारबाग से बसंतकुंज तक प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के सेकंड फेज को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। इसके लिए दूसरा टेंडर जारी कर दिया गया है। मेट्रो प्रशासन के मुताबिक यह टेंडर एक से डेढ़ महीने में फाइनल हो जाएगा और अप्रैल से निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। बसंतकुंज में 150 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक मेट्रो डिपो बनाने की तैयारी है।

करीब 5801 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस पूरे प्रोजेक्ट को राज्य और केंद्र सरकार के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा जबकि शेष राशि ऋण के जरिए जुटाई जाएगी। हाल ही में घोषित यूपी बजट में सेकंड फेज के लिए 550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे परियोजना को शुरुआती रफ्तार मिल चुकी है।

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बसंतकुंज में बनने वाला डिपो ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर चलने वाली मेट्रो ट्रेनों का होम बेस होगा। यहां ट्रेनों की पार्किंग, मरम्मत और नियमित जांच के लिए अत्याधुनिक मशीनें लगेंगी। यह डिपो ट्रांसपोर्टनगर डिपो की तर्ज पर विकसित किया जाएगा जो पहले से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है।

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए डिपो में सोलर पावर यूनिट, जीरो डिस्चार्ज सिस्टम, ड्यूल प्लंबिंग, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। यानी मेट्रो सिर्फ रफ्तार नहीं, हरियाली की जिम्मेदारी भी उठाएगी।

ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के तहत कुल 12 किलोमीटर लंबा रूट बनेगा। इसमें ठाकुरगंज से बसंतकुंज तक 5 एलिवेटेड स्टेशन और शहर के व्यस्त इलाकों में 7 अंडरग्राउंड स्टेशन प्रस्तावित हैं। पहले चरण में एलिवेटेड स्टेशनों के निर्माण का टेंडर जारी हो चुका है और जल्द ही अंडरग्राउंड स्टेशनों के लिए भी प्रक्रिया शुरू होगी।

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यूपी मेट्रो के एमडी सुशील कुमार के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया और प्री-कंस्ट्रक्शन कार्यों में तेजी से साफ है कि चारबाग-बसंतकुंज मेट्रो कॉरिडोर अब कागजों से निकलकर जमीन पर उतरने को तैयार है। आने वाले पांच सालों में लखनऊ की यातायात तस्वीर बदलने वाली है।

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