लखनऊ, 14 फरवरी 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ में प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे की जानलेवा डोर का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शहर में उड़ती पतंगों की अदृश्य डोर राहगीरों और बाइक सवारों के लिए ‘साइलेंट किलर’ बन चुकी है। लगातार घटनाएं हो रही हैं। शनिवार को हुसैनगंज इलाके में 29 वर्षीय मोहम्मद मुशर्रफ अपनी पत्नी और छोटी बच्ची के साथ बाइक से लालकुआं जा रहे थे। फ्लाईओवर पर अचानक सामने आई चाइनीज मांझे की धार उनकी गर्दन में उलझ गई।
तेज कट लगते ही दर्द से घबराकर उन्होंने ब्रेक मारी और बाइक फिसल गई। तीनों सड़क पर गिर पड़े। राहगीरों की मदद से उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद मुशर्रफ की हालत स्थिर बताई गई। गनीमत रही कि वे फ्लाईओवर से नीचे नहीं गिरे और पीछे से आ रहे किसी वाहन की चपेट में नहीं आए।

एक दिन पहले शुक्रवार को कैंट इलाके में बाइक सवार ध्रुव नारायण पांडे की गर्दन में भी मांझा उलझ गया। खून बहता देख दोस्त ने बाइक रोकी और उन्हें सिविल अस्पताल ले जाया गया जहां घाव पर छह टांके लगाए गए। इससे पहले चौक में 7 फरवरी को नजम खान की गर्दन पर गंभीर घाव हो गया था। यहियागंज उद्योग व्यापार मंडल कार्यालय सचिव विमलेश तिवारी की नाक पर गंभीर चोट आई।
गत 5 फरवरी को गोमतीनगर विस्तार में संविदा बिजली कर्मी सुधीर कुमार की गर्दन पर गहरा घाव हुआ, उन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसी दिन शहीद पथ पर पूर्व फौजी बृजेश राय के चेहरे पर करीब 10 इंच लंबा घाव पड़ा। इलाज के लिए डॉक्टर को 30 टांके लगाने पड़े।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रहा चाइनीज मांझा लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि कार्रवाई कागजों तक सीमित है। मांग उठ रही है कि मांझा बेचने और इस्तेमाल करने वालों पर सख्त अभियान चलाया जाए। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।






