Uttar Pradesh

सौर ऊर्जा से सिंचाई की नई क्रांति : UP में PM कुसुम योजना बनी किसानों का पावर सपोर्ट सिस्टम

कृषि फीडरों के सोलराइजेशन से किसानों को दिन में बिजली, डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति में सुधार की उम्मीद, कौशांबी और बिजनौर की पायलट परियोजनाएं बनीं मॉडल, सब्सिडी बोझ घटाने की दिशा में ठोस कदम

लखनऊ, 24 फरवरी 2026:

यूपी में ऊर्जा क्षेत्र के संरचनात्मक सुधारों को नई रफ्तार मिली है। कृषि फीडरों के सोलराइजेशन के लिए लागू प्रधानमंत्री कुसुम योजना (कंपोनेंट सी2) प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी कदम बनकर उभर रही है। योजना का लक्ष्य डीजल और परंपरागत बिजली पर निर्भरता घटाते हुए दिन के समय किसानों को निर्बाध और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराना है।

प्रदेश में अब तक करीब 1708.1 मेगावाट क्षमता के लिए 581 पावर परचेज एग्रीमेंट निष्पादित हो चुके हैं। इससे अनुमान है कि लगभग 3.67 लाख कृषि उपभोक्ताओं को दिन में नियमित बिजली आपूर्ति मिल सकेगी। यह पहल खेतों में सिंचाई को स्थिर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ऊर्जा सुरक्षा का भरोसा भी दे रही है।

वित्तीय ढांचे के तहत केंद्र सरकार प्रति मेगावाट अधिकतम 1.05 करोड़ रुपये और राज्य सरकार 50 लाख रुपये की पूंजीगत सहायता दे रही है। 1.55 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट तक की मदद से परियोजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने में सहूलियत मिल रही है।

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कौशांबी और बिजनौर में स्थापित करीब 3.3 मेगावाट की पायलट परियोजनाएं व्यापक क्रियान्वयन के लिए मॉडल के तौर पर देखी जा रही हैं। इनसे मिले अनुभवों के आधार पर अन्य जिलों में भी सौर परियोजनाओं की गति तेज की जा रही है। स्थानीय स्तर पर उत्पादन से ट्रांसमिशन और पावर अनुरक्षण लागत घटने की उम्मीद है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक कृषि फीडरों के सोलराइजेशन से डिस्कॉम की वित्तीय सेहत में मध्यम अवधि में सुधार संभव है। रियायती दरों पर बिजली आपूर्ति से सब्सिडी दबाव घटेगा। दिन के समय महंगी बिजली खरीदने की जरूरत कम होगी। एटी&सी लॉस घट सकता है। कैश फ्लो व ऊर्जा लेखांकन में पारदर्शिता बढ़ेगी।

हालांकि, बैंकिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाना, भुगतान सुरक्षा तंत्र मजबूत करना और परियोजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग जरूरी होगी। इन शर्तों के साथ कुसुम सी2 उत्तर प्रदेश में कृषि बिजली आपूर्ति सुधार और सब्सिडी बोझ घटाने का गेमचेंजर साबित हो सकता है।

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