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ईरान में सत्ता परिवर्तन! वरिष्ठ धर्मगुरु अराफी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर… जानिए क्या होगी भूमिका

खामनेई की मृत्यु के बाद क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की संभावना, ईरान के भीतर तथा आसपास के क्षेत्रों में बढ़ सकती है अस्थिरता

न्यूज डेस्क, 1 मार्च 2026:

ईरान के इतिहास में आज एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया है। शनिवार को इस्राइल और अमेरिका के संयुक्त युद्धबलों द्वारा किए गए बड़े ताबड़तोड़ हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की मौत हो गई है। 1989 से देश का नेतृत्व कर रहे 86 वर्षीय खामनेई पर किए गए इस अप्रत्याशित सबसे बड़े हमले के बाद ईरान ने पहले इन खबरों से इनकार किया लेकिन बाद में उनकी मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि कर दी गई।

खामनेई की मौत की घोषणा के साथ ही देश में संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत सत्ता का संक्रमण शुरू हो गया है। ईरान की व्यवस्था के अनुसार सुप्रीम लीडर की अनुपस्थिति में एक अंतरिम नेतृत्व परिषद की स्थापना की जाती है। वह देश के प्रशासन और सुरक्षा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णयों को संभालती है। इसी प्रक्रिया के तहत वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त किया गया है।

Six Arrests Bombings and Then Supreme Power Explained

अराफी को अंतरिम नेतृत्व परिषद में न्यायविद सदस्य के रूप में शामिल किया गया था। परिषद के अन्य सदस्य जिनमें राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसनी एजई तथा गार्जियन काउंसिल का एक वरिष्ठ धर्मगुरु शामिल हैं। ये अब संयुक्त रूप से देश के प्रशासन और सुरक्षा नीतियों की अगुवाई करेंगे।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक अराफी की प्राथमिकता ईरान में शासन व्यवस्था को स्थिर रखना और शांतिपूर्ण संक्रमण सुनिश्चित करना है जिससे अगले स्थायी सुप्रीम लीडर का चयन संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार सुचारू रूप से हो सके।

विश्लेषकों का कहना है कि खामनेई की मृत्यु के बाद क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। ईरान के भीतर तथा आसपास के क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ सकती है। ईरान की जनता समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस असाधारण शक्ति संक्रमण और उसके प्रभावों पर टिकी हुई हैं।

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