लखनऊ, 6 मार्च 2026:
प्रदेश की योगी सरकार ने वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक शेषनाथ पांडेय को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। शासन ने उन्हें भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा के लिए अयोग्य भी घोषित किया है।
जारी आदेश के अनुसार विभागीय जांच अधिकारी की रिपोर्ट, उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्य, संबंधित अधिकारी के जवाब और लोक सेवा आयोग की सहमति के बाद यह कार्रवाई की गई। जांच में लगाए गए 15 आरोपों में से 14 आरोप सही पाए गए।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि पांडेय ने वित्तीय अनियमितताएं कीं, तथ्यों को छिपाया, न्यायालय के आदेशों की अनदेखी की और नियमों के विरुद्ध निर्णय लेकर अनुचित लाभ पहुंचाया। इसे उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 का उल्लंघन माना गया है।
जांच में यह भी पाया गया कि एक मदरसे में पहले से सेवा समाप्त किए जा चुके व्यक्ति के लिए बिना वैध पुनर्नियुक्ति आदेश के वित्तीय स्वीकृति बहाल कर वेतन भुगतान का आदेश दिया गया। इससे एक ही पद पर दो लोगों के वेतन भुगतान की स्थिति बन गई। साथ ही यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लिए और उत्तर प्रदेश अशासकीय मदरसा विनियमावली 1987 तथा संशोधित विनियमावली 2016 के प्रावधानों का पालन नहीं किया।






