एमएम खान
मोहनलालगंज (लखनऊ), 8 मार्च 2026:
राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र के निगोहा स्थित मीरख नगर गांव की रहने वाली बिटाना देवी ने मेहनत और लगन से डेयरी उद्योग में अपनी अलग पहचान बनाई है। पांचवीं तक पढ़ाई करने वाली बिटाना देवी ने करीब 38 साल पहले दो गायों से डेयरी का काम शुरू किया था। आज उनके यहां सालाना लगभग 30 से 40 हजार लीटर दूध का उत्पादन होता है और इससे वह हर साल करीब 8 से 10 लाख रुपये तक की आमदनी कर लेती हैं।
डेयरी क्षेत्र में बेहतर काम के लिए उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 14 फरवरी 2018 को कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें उत्कृष्ट कृषक पुरस्कार से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें 15 बार गोकुल पुरस्कार और अन्य कई मंचों पर सम्मान भी मिल चुका है।
बचपन से ही जिम्मेदारियों का सामना
‘द हो हल्ला’ ने बिटाना देवी से विशेष मुलाकात कर उनकी सफलता का सफर जाना। वो बताती हैं कि उनका जन्म रायबरेली जिले के सेहगो गांव में हुआ था। उनके पिता राम नारायण किसान थे और खेती से ही परिवार का खर्च चलता था। परिवार में दो भाई और एक बहन हैं और वह सबसे छोटीं हैं। गांव में उस समय लड़कियों की पढ़ाई को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। किसी तरह उन्होंने पांचवीं तक पढ़ाई पूरी की, लेकिन आगे पढ़ने की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। करीब 16 साल की उम्र में उनकी शादी लखनऊ के निगोहा निवासी हरिनाम से हो गई, जो सरकारी स्कूल में शिक्षक थे और अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

दो गायों से शुरू हुआ डेयरी का सफर, मजाक उड़ा लेकिन प्रयास जारी रखा
बिटाना देवी बताती हैं कि 1982 में उनके घर पहला बेटा हुआ। उसी समय उनके पिता ने बच्चे के लिए एक गाय खरीद कर दी थी। उन्होंने गाय की अच्छी तरह देखभाल की और धीरे धीरे दूध उत्पादन बढ़ने लगा। कुछ समय बाद परिवार ने एक और गाय खरीद ली। वर्ष 1990 में पराग डेयरी के एक प्रभारी उनके घर आए। उन्होंने घर में गायें देखकर डेयरी का काम बढ़ाने की सलाह दी। इसके बाद उनके पति ने भी डेयरी उद्योग शुरू करने का सुझाव दिया। बिटाना देवी ने इसे अपनाया और धीरे धीरे गाय और भैंसों की संख्या बढ़ाने लगीं। उस समय उनके पति नौकरी में व्यस्त रहते थे, इसलिए पशु खरीदने से लेकर उनकी देखभाल तक का काम उन्होंने खुद संभाला। शुरुआत में कुछ लोगों ने मजाक भी उड़ाया, लेकिन उन्होंने मेहनत जारी रखी।
कई पुरस्कारों से हो चुकी हैं सम्मानित
डेयरी के क्षेत्र में लगातार बेहतर काम के कारण बिटाना देवी को कई बार सम्मान मिला। वर्ष 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें कृषक सम्मान दिया था। वहीं वर्ष 2006 से 2016 के बीच उन्हें प्रदेश सरकार की ओर से दस बार गोकुल पुरस्कार भी मिला। बाद में भी उन्हें कई बार यह सम्मान दिया गया।
चोट लगी लेकिन हिम्मत नहीं छोड़ी
बिटाना देवी बताती हैं कि एक बार पशु बांधते समय उनका पैर फिसल गया था और पैर टूट गया था। उस समय काम में काफी दिक्कत हुई। इसके बाद उन्हें पशुओं की संख्या कुछ कम करनी पड़ी। पहले उनकी सालाना आमदनी 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच जाती थी, लेकिन अब करीब 8 से 10 लाख रुपये तक रह गई है।

रोज सुबह से शुरू हो जाता है काम
वर्तमान में उनके पास करीब 25 गाय और भैंसें हैं। वह हर साल लगभग 30 से 40 हजार लीटर दूध बेचती हैं। दूध के साथ गोबर की खाद से भी आमदनी होती है। बिटाना देवी रोज सुबह करीब पांच बजे उठ जाती हैं। सबसे पहले पशुओं को चारा देती हैं और उसके बाद दूध निकालने का काम करती हैं। करीब डेढ़ से दो घंटे में दूध निकालने का काम पूरा हो जाता है। उन्होंने कुछ समय के लिए दूध निकालने की मशीन भी खरीदी थी, लेकिन उन्हें हाथ से दूध निकालना ही ज्यादा ठीक लगा, इसलिए बाद में मशीन का इस्तेमाल बंद कर दिया।
आज बिटाना देवी अपने अनुभव के आधार पर गांव की अन्य महिलाओं को भी डेयरी व्यवसाय अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने यह साबित किया है कि छोटे स्तर से शुरू किया गया काम भी आगे चलकर बड़ी सफलता में बदल सकता है।






