लखनऊ, 10 मार्च 2026:
राजधानी में मंगलवार को वामपंथी दलों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका व इज़राइल की कार्रवाई के विरोध में संयुक्त रूप से विरोध मार्च निकाला। यह मार्च परिवर्तन चौक से शुरू होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा, जहां राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया।
इस विरोध मार्च में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के पदाधिकारी व कार्यकर्ता शामिल हुए। मार्च के दौरान प्रतिभागियों ने अंतरराष्ट्रीय शांति और संप्रभुता के समर्थन में नारे लगाए।

वक्ताओं ने कहा कि ईरान के खिलाफ की जा रही सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और किसी भी देश की संप्रभुता के खिलाफ है। उनका कहना था कि बड़ी ताकतें लंबे समय से तेल और प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण के लिए दूसरे देशों के मामलों में दखल देती रही हैं। उन्होंने वेनेजुएला और ईरान से जुड़ी हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां वैश्विक शांति के लिए ठीक नहीं हैं।
भाकपा जिला प्रभारी रमेश सिंह सेंगर ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई को लेकर दुनिया के लोकतांत्रिक और शांति पसंद लोगों को आवाज उठानी चाहिए। वहीं भाकपा मार्क्सवादी की जिला सचिव मधु गर्ग ने कहा कि किसी भी देश पर हमला केवल उस देश का मामला नहीं होता, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक स्थिरता पर असर पड़ता है।
जिला कमेटी सदस्य रिजवान ने कहा कि दुनिया के कई देशों में इसी तरह की सैन्य कार्रवाई पहले भी देखने को मिली है और इस तरह के कदमों का लोकतांत्रिक ताकतों को मिलकर विरोध करना चाहिए। ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता उदय नाथ सिंह ने कहा कि वामपंथी दल हमेशा युद्ध और साम्राज्यवादी राजनीति के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने भारत सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने और विश्व शांति के समर्थन में पहल करने की मांग की।







