अयोध्या, 11 मार्च 2026:
दुष्कर्म मामले में सजायाफ्ता आसाराम बापू रामनगरी अयोध्या पहुंचे और बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन-पूजन किए। मंगलवार देर शाम ही अयोध्या पहुंचकर आसाराम ने सबसे पहले मां सरयू के तट पर पूजा-अर्चना की और सरयू की महाआरती में भी भाग लिया। बुधवार सुबह वे आद्य शंकराचार्य द्वार से राम मंदिर परिसर में प्रवेश कर रामलला के दरबार में पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 30 मिनट तक दर्शन और पूजा की।
मंदिर निर्माण से जुड़े प्रभारी गोपाल राव ने उन्हें मंदिर निर्माण की प्रगति की जानकारी भी दी। दर्शन के बाद आसाराम ने मीडिया से बातचीत करते हुए भारत के प्राचीन तीर्थों और मोक्षदायी स्थलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में सात ऐसे तीर्थ स्थान बताए गए हैं, जहां जाने या प्राण त्यागने से मनुष्य का कल्याण होता है। इन स्थानों में अयोध्या, मथुरा, माया यानी हरिद्वार, काशी, कांची, अवंतिका और पुरी शामिल हैं।
आसाराम के अनुसार मानव शरीर में वात, कफ और पित्त तीन दोष होते हैं। तीर्थस्थलों पर जाने से इन दोषों का प्रभाव कम होता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में अयोध्या को पहला स्थान दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि मथुरा में रहने वाला व्यक्ति यदि साधु के वेश में रहकर भी साधु का दायित्व न निभा पाया हो तब भी वहां मृत्यु होने पर उसे नरक नहीं जाना पड़ता।
हालांकि आसाराम के अयोध्या पहुंचने को लेकर कुछ लोगों ने नाराजगी भी जताई है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने सवाल उठाते हुए लिखा कि क्या मंदिर ट्रस्ट के पास ऐसे अतिथियों के लिए भी समय है। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है।






