लखनऊ, 15 मार्च 2026:
यूपी में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए स्थापित वन स्टॉप सेंटर अब भरोसे और सहारे के मजबूत केंद्र के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से हिंसा या उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को तत्काल मदद मिलने के साथ ही कई परिवारों को टूटने से भी बचाया जा रहा है।
प्रदेश के औरैया स्थित वन स्टॉप सेंटर में कुछ माह पहले एक महिला घबराई हुई अवस्था में पहुंची। घरेलू कलह और लगातार बढ़ते विवादों के कारण उसका पारिवारिक जीवन टूटने की कगार पर पहुंच चुका था। केंद्र में मौजूद परामर्शदाताओं ने धैर्य और संवेदनशीलता के साथ उसकी पूरी बात सुनी और समस्या को समझने के बाद पहल करते हुए उसके पति को भी बुलाया। इसके बाद दोनों की काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू हुई।
कई दौर की बातचीत और समझाने के बाद पति-पत्नी के बीच संवाद का रास्ता खुला और आपसी मतभेद दूर हो गए। परिणाम यह रहा कि एक परिवार टूटने से बच गया। महिला ने बाद में बताया कि अब उसका दाम्पत्य जीवन सामान्य हो गया है। घर का माहौल पहले से बेहतर है।
यह मामला बताता है कि प्रदेश में संचालित वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए प्रभावी सहायता तंत्र के रूप में स्थापित हो चुके हैं। यहां पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सकीय सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, विधिक सलाह और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाती है। आवश्यकता पड़ने पर महिलाओं को पांच दिनों तक अल्प प्रवास की सुविधा भी दी जाती है जिससे संकट की घड़ी में उन्हें सुरक्षित वातावरण मिल सके।
महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण को प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने इन केंद्रों के नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया है। वर्तमान में प्रदेश के 75 जिलों में 96 वन स्टॉप सेंटर संचालित हो रहे हैं। बड़ी आबादी को ध्यान में रखते हुए कई जिलों में अतिरिक्त केंद्र स्थापित करने की भी स्वीकृति दी गई है। इससे अधिक से अधिक महिलाओं तक समय पर सहायता पहुंच सकेगी।
महिला सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बनाने के लिए हर वन स्टॉप सेंटर पर आकस्मिक सेवाओं के लिए एक वाहन की व्यवस्था भी की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संकट की स्थिति में किसी भी महिला को मदद के लिए भटकना न पड़े और उसे सुरक्षित माहौल में तुरंत हर जरूरी सहयोग मिल सके।






