लखनऊ, 18 मार्च 2026:
यूपी में आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित होने वाले अनुपूरक पुष्टाहार को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए लागू की गई चेहरा पहचान प्रणाली (फेस रिकॉग्निशन सिस्टम-एफआरएस) के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। फरवरी माह में प्रदेश के लगभग एक करोड़ लाभार्थियों में से करीब 81 लाख लोगों को इसी डिजिटल प्रणाली के माध्यम से पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया।
भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के निर्देशों के तहत प्रदेश में अब एफआरएस प्रणाली के जरिए ही पुष्टाहार वितरण को मान्यता दी गई है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों के अनुसार जल्द ही इस प्रणाली के माध्यम से शत-प्रतिशत वितरण का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।
प्रदेश में अनुपूरक पुष्टाहार के लगभग एक करोड़ लाभार्थी हैं। इनमें छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं प्रमुख रूप से शामिल हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने डिजिटल व्यवस्था को तेजी से अपनाते हुए फरवरी में करीब 81 प्रतिशत लाभार्थियों तक पुष्टाहार पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है। इस तरह फरवरी में लगभग 81 लाख लाभार्थियों को फेस रिकॉग्निशन प्रणाली के जरिए पुष्टाहार उपलब्ध कराया गया।
विभाग के मुताबिक यह उपलब्धि पोषण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। योगी सरकार के कार्यकाल में तकनीक आधारित व्यवस्था लागू होने से यह सुनिश्चित हो रहा है कि पोषण योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे।
प्रदेश सरकार पोषण योजनाओं के दायरे को लगातार विस्तार दे रही है। इसी क्रम में आठ जनपदों में किशोरियों को भी अनुपूरक पुष्टाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मार्च माह में भी एफआरएस प्रणाली के माध्यम से वितरण की प्रगति संतोषजनक है। उम्मीद है कि लाभार्थियों तक पहुंच का प्रतिशत फरवरी से अधिक होगा। डिजिटल निगरानी और तकनीक आधारित व्यवस्था से पोषण योजनाओं का क्रियान्वयन और अधिक प्रभावी बनता दिखाई दे रहा है।






