Lucknow City

महिला सम्मान के मंच से सपा का शक्ति प्रदर्शन : अखिलेश-डिंपल ने साधा ‘आधी आबादी’ का भरोसा

सपा दफ्तर में आयोजित समारोह में खेल, शिक्षा, विज्ञान, मानवाधिकार, साहित्य, पत्रकारिता, लोकसंस्कृति आदि क्षेत्रों की महिलाओं को किया गया सम्मानित, डिंपल यादव ने महिलाओं की स्थिति पर जताई चिंता

लखनऊ, 22 मार्च 2026:

यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में रविवार को आयोजित ‘मूर्ति देवी-मालती देवी महिला सम्मान समारोह’ राजनीति और सामाजिक संदेश का एक बड़ा मंच बनकर उभरा। सपा मुखिया अखिलेश यादव, सांसद डिंपल यादव और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस आयोजन के जरिए सपा ने महिला सशक्तिकरण का संदेश देने के साथ दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक (पीडीए) समीकरण को भी मजबूत करने का प्रयास किया।

समारोह में खेल, शिक्षा, विज्ञान, मानवाधिकार, साहित्य, पत्रकारिता और लोकसंस्कृति जैसे विविध क्षेत्रों की महिलाओं को सम्मानित किया गया। क्रिकेटर पूनम यादव को ‘रानी लक्ष्मीबाई सम्मान’ से नवाजा गया, जबकि अदम्य साहस के लिए रीमा गौतम को ‘फूलन देवी सम्मान’ मिला। जनजागरण के क्षेत्र में सक्रिय रोशनी को ‘ऊदा देवी-झलकारी बाई सम्मान’ दिया गया। शिक्षा क्षेत्र में डॉ. रीता चौधरी और कहकशा अरबी को ‘सावित्रीबाई फुले-फातिमा शेख सम्मान’ प्रदान किया गया।

विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. कमर रहमान को ‘डॉ. सावित्री सम्मान’ और चिकित्सा सेवा के लिए डॉ. नैय्यरा शकील को ‘डॉ. रमा यादव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। पत्रकारिता में डॉ. माधुरी काकोटी और अजीज कविश लेनिन को ‘महादेवी वर्मा सम्मान’ मिला। साहित्य के क्षेत्र में डॉ. रेनू यादव और उर्दू साहित्य में योगदान के लिए डॉ. सबीहा अनवर को सम्मानित किया गया। वहीं लोकनाट्य में मधु अग्रवाल को ‘गुलाब बाई सम्मान’ और थिएटर व फिल्म क्षेत्र में अर्चना आर्य को ‘जद्दन बाई सम्मान’ दिया गया। सांप्रदायिक सौहार्द के लिए सुमन पांडे और बुशरा को ‘बेगम हजरत महल सम्मान’ मिला, जबकि मानवाधिकारों के लिए शहनाज सिद्दीकी और दलित विमर्श में योगदान के लिए डॉ. प्रियंका सोनकर को भी सम्मानित किया गया।

SP's Shakti Pradarshan Women's Rights Celebrated (1)

इस मौके पर डिंपल यादव ने महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तभी देश आगे बढ़ता है, लेकिन आज कई जगहों पर महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा है और घटनाओं को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी केस का जिक्र करते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और अपने हक के लिए आगे आने का आह्वान किया।

अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में सामाजिक सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाज में आज भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि हम नाम पहले महिला का लेते हैं लेकिन तवज्जो पुरुष को मिलती है। यहां तक कि पुरुष के रोने पर भी उसे महिलाओं से जोड़कर देखा जाता है। उन्होंने अपनी सरकार के दौरान शुरू की गई 1090 महिला हेल्पलाइन और डायल 100 जैसी सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं की सराहना सुप्रीम कोर्ट तक ने की थी।

अखिलेश ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में सपा सरकार बनने पर रानी लक्ष्मीबाई और अन्य वीरांगनाओं के नाम पर महिलाओं के लिए नई योजनाएं शुरू की जाएंगी। उन्होंने कहा कि आधी आबादी को साथ लिए बिना देश को तरक्की के रास्ते पर नहीं ले जाया जा सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह आयोजन आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि सपा की यह पहल चुनावी मैदान में कितना असर दिखाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button