प्रमोद कुमार
मलिहाबाद (लखनऊ), 2 अप्रैल 2026:
यूपी की राजधानी लखनऊ का प्रसिद्ध मलिहाबाद का फलपट्टी क्षेत्र समय गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। देश-विदेश में अपने दशहरी आम के लिए
पहचाने जाने वाले मलिहाबाद के आम बागवानों के सामने एक साथ दो संकट खड़े हो गए हैं। बेमौसम बारिश के साथ अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते निर्यात में अनिश्चितता ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है।
इस साल आम के पेड़ों में बौर निकलने के समय मौसम अनुकूल रहा। इससे बागवानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी थी। पिछले दिनों अचानक हुई बारिश ने इस उम्मीद पर पानी फेरने का खतरा पैदा कर दिया है। बढ़ी हुई नमी के कारण बौर काले पड़ने लगे हैं। फफूंदी जनित रोग खासकर दहिया रोग तेजी से फैलने की आशंका बढ़ गई है।
बागवान इस स्थिति से निपटने के लिए दवाओं का छिड़काव करने में जुटे हैं लेकिन डीजल की किल्लत ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। स्थानीय बागवान फसी अहमद बताते हैं कि समय पर दवा का छिड़काव ही फसल को बचा सकता है लेकिन पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ और डीजल की कमी के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और आंधी ने मलिहाबाद और काकोरी क्षेत्र में आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया था। बागवानों का कहना है कि मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। इससे बौर निकलने से लेकर फल पकने तक की पूरी प्रक्रिया अनिश्चित होती जा रही है।
इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजराइल-ईरान तनाव ने भी आम व्यापार को प्रभावित करनने की चिंता बढ़ा दी है। मलिहाबाद का दशहरी व अन्य आम खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर निर्यात किए जाते हैं लेकिन मौजूदा हालात के चलते शिपिंग रूट प्रभावित हो रहे हैं। कंटेनर किराया और बीमा लागत बढ़ने से निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है।
हवाई और समुद्री मार्गों में अनिश्चितता के कारण पैक हाउस संचालकों और निर्यातकों को भारी नुकसान की आशंका सता रही है। ऐसे में मलिहाबाद के आम बागवानों के सामने फसल बचाने और बाजार तक पहुंचाने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है।






