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वैश्विक तनाव के बीच बढ़ी ताकत…INS अरिदमन नौसेना में शामिल, भारत को मिली परमाणु पनडुब्बी

विशाखापत्तनम में हुए कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने स्वदेशी पनडुब्बी को बताया बड़ी उपलब्धि, के-15 और के-4 मिसाइलों से लैस अरिदमन दुश्मन के लिए पकड़ से बाहर रहने वाली ताकत मानी जा रही

नई दिल्ली/विशाखापत्तनम, 3 अप्रैल 2026:

भारत की समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है। स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को शुक्रवार को भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘अरिदमन’ सिर्फ नाम नहीं, बल्कि देश की असली ताकत है। इसी कार्यक्रम में नौसेना को एक और बड़ी सौगात मिली। स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस तारागिरी को भी कमीशन किया गया।

विशाखापत्तनम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस पनडुब्बी को औपचारिक तौर पर नौसेना को सौंपा गया। यह बैलिस्टिक मिसाइल से लैस तीसरी परमाणु पनडुब्बी है, जिससे भारत की रणनीतिक क्षमता और मजबूत हुई है।

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अरिदमन की खासियत इसकी स्टील्थ क्षमता है। यह पानी के भीतर करीब 44 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है और इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल माना जाता है। इसमें के-15 और के-4 जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं, जो इसे और घातक बनाती हैं।

तकनीकी रूप से भी यह पनडुब्बी काफी उन्नत है। पानी के ऊपर इसका वजन करीब 6 हजार टन है, जबकि पूरी तरह डूबने पर यह करीब 7 हजार टन तक पहुंच जाता है। इसे चलाने के लिए 83 मेगावाट का परमाणु रिएक्टर लगाया गया है, जिसकी तकनीक देश में ही विकसित की गई है। इस पर करीब 100 नौसैनिकों का दल तैनात रहता है।

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अरिदमन आकार और क्षमता के लिहाज से पहले की पनडुब्बियों से ज्यादा बड़ी और ताकतवर मानी जा रही है। इससे पहले इस परियोजना के तहत आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघात को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।

इसी कार्यक्रम में नौसेना को एक और बड़ी सौगात मिली। स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस तारागिरी को भी कमीशन किया गया। यह जहाज 75 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी तकनीक से तैयार हुआ है और आधुनिक स्टील्थ फीचर्स से लैस है।

मौजूदा समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को लगातार मजबूत कर रहा है। अरिदमन और तारागिरी की तैनाती इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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